*एसबीआई इकोरैप की एक रिपोर्ट : साल-दर-साल (YoY) पर 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी लगभग 9.5 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*एसबीआई इकोरैप की एक रिपोर्ट :  साल-दर-साल (YoY) पर 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी लगभग 9.5 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई


【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】 यह रिपोर्ट राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय एनएसओ द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान जारी करने के एक दिन बाद आई है। तदनुसार अनुमानों में कहा गया था कि वित्त वर्ष 2012 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में भारत की अर्थव्यवस्था के 9.2 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। एनएसओ के आंकड़ों ने संकेत दिया था कि वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी 2011-12 वर्ष 2020 के लिए जीडीपी का अनंतिम अनुमान 135.13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 147.54 लाख करोड़ रुपये हो गया हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हम मानते हैं कि NSO का अनुमान रूढ़िवादी पक्ष पर है क्योंकि निर्माण के लिए H2 FY22 के लिए गणना की गई GDP वृद्धि (-) 0.9 प्रतिशत है । H2 FY22 के लिए सेवाएँ मात्र 2 प्रतिशत पर हैं। हम अभी भी मानते हैं कि वित्त वर्ष 22 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद लगभग 9.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा। इस बीच इस अनुमान में केवल दो महीने का शेल्फ-लाइफ है और इसे केवल बजट अंकगणित के लिए एक इनपुट के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि NSO FY19, FY20 और FY21 का पहला संशोधित अनुमान 31 जनवरी '21 को जारी करेगा।हम मानते हैं कि FY22 के लिए फरवरी '21 और मई '21 में आंकड़ों को फिर से संशोधित किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार आगे चलकर भले ही बढ़ते कोविड संक्रमण गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं फिर भी आर्थिक गतिविधियों के ज्यादा प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के साथ-साथ दुनिया भर में मामले काफी बढ़ रहे हैं। हालांकि अब तक के अध्ययनों से पता चलता है कि मौजूदा ओमाइक्रोन संस्करण डेल्टा संस्करण की तुलना में कम गंभीर है। डेटा भी इस तथ्य की पुष्टि करता है। जबकि नए मामलों की संख्या अक्टूबर '21 में 1.3 करोड़ से बढ़कर दिसंबर '21 में लगभग दोगुनी होकर 2.5 करोड़ हो गई, मौतों की संख्या स्थिर रही । अक्टूबर की तुलना में दिसंबर में सिर्फ 2,200 अधिक मौतें हुईं थी ।

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि संशोधित सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए भले ही हम सरकार द्वारा दिसंबर '21 की शुरुआत में घोषित अतिरिक्त खर्च पर विचार करें । सरकार का राजकोषीय घाटा अभी भी 15.88 लाख करोड़ रुपये या 6.8 प्रतिशत है।  जीडीपी वित्त वर्ष 23 के लिए  चालू वित्त वर्ष से राजकोषीय समेकन 30-40 बीपीएस तक सीमित रहना चाहिए। 【Photo Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#जीडीपी

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