√● किसान सरकार से क्या चाहते हैं, क्या हैं उनकी प्रमुख मांगें आओ जाने / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
√● किसान सरकार से क्या चाहते हैं, क्या हैं उनकी प्रमुख मांगें आओ जाने / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】
केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ किसानों का आज तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी है। दूसरे दिन 27 नवंबर को तमाम रुकावटों के बावजूद भी हरियाणा के रास्ते हजारों की संख्या में किसान दिल्ली पहुंच गये। कई जगह आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने किसानों को आने की अनुमति दी और बुराड़ी के निरंकारी मैदान में शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने पर किसान संगठनों के बीच सहमति बनी। हालांकि किसान अभी भी सिंघु बॉर्डर पर डंटे हुए हैं।
किसानों का 26 नवंबर से 28 नवंबर तक चलने वाले दिल्ली चलो प्रोटेस्ट मार्च के दूसरे दिन शुक्रवार 27 नवंबर को खूब बवाल मचा रहा। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, लेकिन किसान पीछे हटने को राजी नहीं हैं। किसान आंदोलन के तीसरे दिन 28 नवंबर को भी प्रदर्शन कर रहे हैं और देश की राजधानी नई दिल्ली के कई हिस्सों में रुके हुए हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि सरकार किसानों से तीन दिसंबर को बात करेंगे, लेकिन ये किसान आंदोलन कर क्यों रहे हैं, क्या बस तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग है? आइये जानते हैं प्रदर्शन कर रहे किसानों की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं।
●वापस हो कृषि कानून । किसानों की पहली और सबसे बड़ी मांग ये है कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। आंदोलन के लिए गठित संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ कहते हैं कि कृषि कानून किसानों के पक्ष में नहीं है। इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। जमाखोरी बढ़ेगी। बड़ी निजी कंपनियों को फायदा होगा। किसानों का आने वाले भविष्य मुश्किल भरा होगा।
●न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लिखित आस्वासन । जब से कृषि विधेयकों की बात हो रही है, तब से किसानों के मन में सबसे बड़ा डर यही है कि नये कृषि बिलों से सरकार न्यनूतम समर्थन मूल्य प्रणाली को ही खत्म कर देगी।किसानों में यही डर दिखा।59 फीसदी किसानों ने यह भी कहा कि एमएसपी पर अनिवार्य कानून बनना चाहिये। किसानों की सबसे बड़ी मांगों में से एक मांग यह भी कि सरकार लिखित रूप से दे कि भविष्य में सेंट्रल पूल के लिए MSP और पारंपरिक खाद्य अनाज खरीद प्रणाली जारी रहेगी।
●बिजली बिल संशोधन रद्द किया जाये । किसानों की तिसरी सबसे बड़ी मांग यह है कि सरकार बिजली बिल संशोधन को समाप्त करे। किसान संगठनों का कहना है कि अगर यह बिल कानून बन जायेगा तो उन्हें मुफ्त या सब्सिडी वाली बिजली नहीं मिलेगी। निजीकरण को बढ़ावा दिया जायेगा और पंजाब में किसानों को मिल रही मुफ्त बिजली बंद हो जायेगी। पराली जलाने पर सजा-जुर्माने का नियम बंद हो । किसानों की चौथी मांग है कि पराली जलाने को लेकर पांच साल सजा का जो प्रावधान किया गया है, इसे वापस लिया जाये। केंद्र सरकार ने इसी साल अक्टूबर में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए नया अध्यादेश पेश किया जिसके अनुसार जो भी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होगा, उसे पांच साल तक की सजा हो सकती है या उस पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लग सकता है। किसान इस प्रावधान को खत्म करने की मांग कर रहे हैं और साथ पराली जलाने के आरोप में गिरफ्तार किसानों की रिहाई की भी मांग कर रहे हैं।
√● ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √●Metro City Post●News Channel●
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