*BRICS में सैन्य गठबंधन नहीं: पेस्कोव का ईरान पर बयान,आपसी मदद की जिम्मेदारी से इनकार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*BRICS में सैन्य गठबंधन नहीं: पेस्कोव का ईरान पर बयान,आपसी मदद की जिम्मेदारी से इनकार*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई



【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】रूस के राष्ट्रपति प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने सोमवार 2 मार्च 2026 को स्पष्ट किया कि BRICS समूह की सदस्यता का मतलब यह नहीं है कि सदस्य देश किसी सदस्य पर सशस्त्र हमले की स्थिति में एक-दूसरे की सैन्य मदद करेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल ने हाल ही में ईरान पर हमले किए हैं । दरअसल यह मुख्य बयान के मुताबिक ब्रिक्स कोई सैन्य गठबंधन नहीं हैं। पेस्कोव ने साफ किया कि BRICS में सदस्यता का मतलब सशस्त्र आक्रमण के दौरान आपसी सहायता प्रदान करने का दायित्व नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि BRICS "एक अलग प्रकृति का संगठन है और इसका उद्देश्य सैन्य सहयोग के बजाय आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी करना है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि ईरान के मुद्दे पर अभी तक BRICS देशों के बीच कोई औपचारिक संपर्क या बातचीत नहीं हुई है। BRICS की प्रकृति के अनुसार वो आर्थिक मंच हैं। यह रुख रूस की लगातार चली आ रही नीति को दर्शाता है। इससे पहले फरवरी 2026 में रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने भी यही दोहराया था कि BRICS न तो सैन्य गठबंधन है और न ही सामूहिक सुरक्षा संगठन। उन्होंने कहा था कि इसे कभी भी उस भावना से नहीं बनाया गया था और न ही इसे उस दिशा में बदलने की कोई योजना है । रयाबकोव ने यहां तक कहा था कि हाल ही में हुए एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास को भी "BRICS आयोजन" नहीं माना जाना चाहिए बल्कि यह सदस्य देशों की अपनी क्षमता पर किया गया अभ्यास था। द्विपक्षीय संपर्क जारी है,निंदा जारी हैं लेकिन सैन्य मदद नहीं। यह स्पष्ट करने के बावजूद कि BRICS इस मामले में कोई सामूहिक भूमिका नहीं निभाएगा । पेस्कोव ने पुष्टि की कि रूस ईरान के नेतृत्व के साथ लगातार द्विपक्षीय संपर्क में है और वहां की स्थिति पर चर्चा कर रहा है। रूस ने अमेरिका-इजराइल हमलों की निंदा भी की है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताया था। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अपने चीनी समकक्ष के साथ फोन पर बातचीत में इन हमलों की निंदा की हालांकि यह निंदा केवल शाब्दिक स्तर पर है। रूस ने ईरान को कोई सैन्य या वित्तीय सहायता देने का कोई संकेत नहीं दिया है । व्यापक संदर्भ पर देखे तो कूटनीति पर जोर दिया गया है। पेस्कोव ने कहा कि रूस इस स्थिति का विश्लेषण कर रहा है और अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार काम करेगा। उन्होंने इस बात पर निराशा भी व्यक्त की कि ओमान की मध्यस्थता में चल रही अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति की खबरों के बावजूद स्थिति प्रत्यक्ष आक्रमण तक जा पहुंची । रूस ने कहा है कि वह इस संकट के राजनयिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में अमेरिका के साथ बातचीत के लिए भी तैयार है। पेस्कोक का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय,विशेष रूप से ईरान को यह स्पष्ट संदेश देता है कि BRICS एक सैन्य समझौता नहीं है हालांकि रूस ईरान के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखेगा और राजनयिक मोर्चे पर उसका समर्थन कर सकता है लेकिन सैन्य हमले की स्थिति में BRICS के ढांचे के तहत किसी सामूहिक रक्षा या सैन्य सहायता की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।【Photo Courtesy Google】

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