*अमेरिका ईरान पर न्यूक्लियर बम क्यों नहीं गिराया? जानिए भू-राजनीति,न्यूक्लियर टैबू और तीसरे विश्व युद्ध की पूरी सच्चाई*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
*अमेरिका ईरान पर न्यूक्लियर बम क्यों नहीं गिराता? जानिए भू-राजनीति,न्यूक्लियर टैबू और तीसरे विश्व युद्ध की पूरी सच्चाई*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई))अमेरिका सीधा ईरान पर न्यूक्लियर बम क्यों नहीं गिरा देता?ये सवाल आपके दिमाग में भी जरूर आया होगा। अभी कुछ दिनों पहले ही पूरी दुनिया को लगा था कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने ही वाला है। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर एक बहुत बड़ा हमला किया लेकिन ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं था। सोचिए अमेरिका के पास दुनिया की सबसे खतरनाक और हाईटेक फौज है साथ ही 5000 न्यूक्लियर बम है लेकिन फिर भी वो चाहकर भी ईरान का कुछ नहीं उखाड़ पा रहा तो भाई अगर बात इतनी ही बिगड़ चुकी थी तो अमेरिका ने एक न्यूक्लियर बम गिराकर खेल ही खत्म क्यों नहीं कर दिया? तो आखिर वो क्या मजबूरी है जो एक सुपर पावर को न्यूक्लियर अटैक करने से रोक रही है? क्या अमेरिका ईरान से डरता है? या फिर इसके पीछे कोई ऐसी डार्क जियोपॉलिटिकल सच्चाई है जिसके बारे में मीडिया बात ही नहीं करना चाहती? इसे शुरू से समझते हैं।
सबसे पहले ये समझना होगा कि ईरान आज अकेला नहीं है। रिपोर्ट्स की माने तो ईरान एक बहुत ही पावरफुल ग्रुप का हिस्सा है । जिसे एक्सपर्ट्स क्रिंक बोल रहे हैं। क्रिंक का मतलब है चाइना,रूस,ईरान और नॉर्थ कोरिया और ये देश सच में एक दूसरे का बहुत चीजों में साथ दे रहे हैं। अब पहले बात करते हैं चीन की। चीन और ईरान ने साल 2021 में एक 25 साल की डील की थी । जिसमें वो एनर्जी,इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेड पर जमकर साथ काम कर रहे हैं। चीन ईरान से बहुत ही सस्ते दाम पर तेल खरीदता है मार्केट रेट से बहुत नीचे तो चीन के लिए ईरान सिर्फ दोस्त नहीं है। वो एक बहुत ज़रूरी एनर्जी पार्टनर है। साल 2026 के पंगे में चीन ने अपनी आर्मी तो नहीं भेजी लेकिन उन्होंने खुलेआम इजराइल और अमेरिका की स्ट्राइक को गलत बोला।
चीन के विदेश मंत्री ने सीधा कह दिया कि ताकत से मैटर सॉल्व नहीं होते। अब बात करते हैं रूस की। जनवरी 2025 में रूस और ईरान ने एक 20 साल की तगड़ी पार्टनरशिप साइन की। हम यहां ट्रेड,मिलिट्री टेक, साइंस और एजुकेशन में एकदम गहरी दोस्ती की बात कर रहे हैं। यूक्रेन वॉर के टाइम ईरान ने रूस को हजारों शायद ड्रोन दिए। बदले में रूस ने उन्हें ट्रेनिंग जेट्स, अटैक हेलीकॉप्टर्स और टॉप लेवल का मिलिट्री गियर दिया। ये एक मस्त डील है और दोनों इसका फुल फायदा उठा रहे हैं। रूस ईरान के सपोर्ट में एक बहुत बड़ा प्लेयर है और नॉर्थ कोरिया को भी हल्के में मत लेना । भले ही वो इस झगड़े में सीधा नहीं घुसे हैं लेकिन वो रूस और चीन के साथ उठते बैठते हैं। वो इस पूरी गेम के सबसे क्रेज़ी और अनप्रिडिक्टेबल खिलाड़ी हैं और उनके पास भी न्यूक्लियर हथियार हैं अगर अमेरिका ईरान पर न्यूक्लियर गिराता है और इसे नॉर्थ कोरिया जैसे देशों को एक ग्रीन सिग्नल मिलेगा कि आप जो जैसा चाहो वैसा परमाणु बम का यूज़ कर सकते हो। कोई आपको रोकने वाला नहीं है अगर अमेरिका ईरान पर बॉम्ब गिराता है तो रूस और चीन इसे सिर्फ ईरान पर हमला नहीं मानेंगे।
वो इसे अपने लिए वार्निंग की तरह देखेंगे। उनके दिमाग में सीधी बात आएगी अगर आज अमेरिका ईरान पर बम गिरा सकता है तो अगला नंबर हमारा भी हो सकता है फिर मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच नहीं रहेगा फिर न्यूक्लियर पावर्स एक दूसरे के सामने खड़ी होंगी। और इसके बाद जो वर्ल्ड वॉर आपने फिल्मों में देखा था उसको आप असल लाइफ में देख पाएंगे। जो कि बहुत बुरी बात है। अब यहां एक बहुत जरूरी चीज़ आती है। न्यूक्लियर टैबू। हिरोशिमा और नागासाकी के बाद सन 1945 से दुनिया में एक तरह का अलिखित नियम बना हुआ है। इसका मतलब है कि चाहे जंग कितनी भी बड़ी क्यों ना हो । कोई न्यूक्लियर बम का इस्तेमाल नहीं करेगा अगर अब अमेरिका न्यूक्लियर यूज़ करता है तो अमेरिका अपनी इज्ज़त हमेशा के लिए खो देगा और फिर अमेरिका ज्ञान भी नहीं पेल पाएगा क्योंकि लोग उसकी बात को सीरियस लेना छोड़ देंगे। यूएन भी उसके खिलाफ जा सकता है।
उसके करीबी दोस्त यूके,फ्रांस, जर्मनी भी उससे दूरी बना सकते हैं। इंडिया,ब्राजील और साउथ अफ्रीका जैसे देश खुलकर अमेरिका के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। इसे ऐसे समझिए। मान लीजिए पूरी दुनिया एक छोटा सा मोहल्ला है। हर देश उस मोहल्ले में रहने वाला एक इंसान है। अब अगर उस मोहल्ले का सबसे ताकतवर आदमी यानी अमेरिका बिना आखिरी मजबूरी के किसी दूसरे आदमी यानी ईरान पर गोली चला दे तो पूरा मोहल्ला उसके खिलाफ हो जाएगा और अमेरिका को कभी नहीं चाहेगा कि पूरी दुनिया उसके खिलाफ एक साथ खड़ी हो जाए और सबसे बड़ा खतरा ये होगा कि दुनिया के हर छोटे देश को लगेगा अगर हमारे पास न्यूक्लियर बम नहीं है तो अमेरिका हमें कभी भी उड़ा सकता है। इस डर से सऊदी अरब,तुर्की,साउथ कोरिया,जापान सब अपना-अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू कर देंगे।
दुनिया का पूरा सुरक्षा ढांचा सेकंडों में ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा लेकिन दोस्त आज के टाइम पे जंग सिर्फ मिसाइल और बॉम्ब से नहीं लड़ी जाती है। आज के टाइम पे ऑनलाइन फाइट भी होती है। एक्स वाली ऑनलाइन फाइट नहीं। मैं बात कर रहा हूं हैकिंग की और इस मामले में ईरान कोई छोटा खिलाड़ी नहीं है। ईरान अपने हैकर्स को खुला छोड़ देगा और वो सिर्फ मिलिट्री बेसिस पर हमला नहीं करेंगे। वो सीधे अमेरिका के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर जाएंगे। इसमें अमेरिका के बैंक,पावर ग्रिड और डैम भी शामिल हैं। वो वाटर प्लांट्स हैक करके पीने के पानी की सप्लाई रोक सकते हैं। ये एक ऐसी ब्लाइंड वॉर होगी जिसमें अमेरिका के लिए अपने ही देश के अंदर अपने नागरिकों को बचाना नामुमकिन हो जाएगा। अपने ही देश के अंदर अपने नागरिकों को बचाना नामुमकिन हो जाएगा।
अमेरिका ने दुनिया के सामने एक कसम खा रखी है कि जिस देश के पास अपना न्यूक्लियर बम नहीं है । हम उस पर कभी परमाणु हमला नहीं करेंगे। इसको ही एनपीटी कहते हैं लेकिन यहां एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है। अमेरिका यह गारंटी सिर्फ उन्हीं देशों को देता है जो ईमानदारी से यह वादा करते हैं कि वह कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएंगे और यहीं ईरान का पेंच फंस जाता है। अमेरिका और इजराइल हमेशा से यह दावा करते आए हैं कि ईरान दुनिया को बेवकूफ बना रहा है और पहाड़ों के नीचे छुप कर अपना न्यूक्लियर बम तैयार कर रहा है लेकिन ईरान इससे मना करता आया है। अमेरिका चाहता है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म हो जाए ताकि वह कभी न्यूक्लियर वेपन ना बना पाए लेकिन दिक्कत यह है कि ईरान ने अपनी न्यूक्लियर फैसिलिटीज बहुत गहराई में पहाड़ों के अंदर छुपाकर बनाई है। यह इतनी गहराई में है कि उनकी सही लोकेशन किसी को भी नहीं पता है और ईरान के इस न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को रोकने के लिए अमेरिका को बहुत सारे न्यूक्लियर बंकर बस्टर गिराने होंगे। ऐसा करने से बहुत ही भयानक लेवल पर रेडिएशन फैलेगा और वह रेडिएशन उड़कर सीधा पड़ोसी देशों में चला जाएगा और पड़ोस में कौन रहता है?
अमेरिका के खुद के दोस्त इजराइल, सऊदी अरब ,यूएई, इराक और यहां अमेरिका के खुद के मिलिट्री बेस हैं यानी अमेरिका का बम खुद उसके ही सैनिकों और दोस्तों की जान ले लेगा। मान लीजिए। अमेरिका ने रेडिएशन की परवाह किए बिना अटैक कर भी दिया। इसके बाद जो होगा। वह पूरी दुनिया की इकॉनमी को रातों-रात फ्रीज कर देगा और उसका नाम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़। दुनिया का 20% से 30% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है और इसके ब्लॉक होने से दुनिया में जो आफत मची हुई है। वह तो आप सब जानते ही हो अगर यह लंबे टाइम तक बंद रहा तो वह दिन दूर नहीं। जब तेल का रेट आसमान छूने लगेगा। दुनिया का स्टॉक मार्केट क्रैश हो जाएगा और महंगाई कई गुना हो जाएगी तो अमेरिका अच्छे से जानता है कि एक जीत के लिए इतना बड़ा सट्टा लगाना एकदम बेवकूफी होगी।
पिछले 40 सालों में ईरान ने मिडल ईस्ट में एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। जिसे कई लोग एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस कहते हैं अगर ईरान पर परमाणु हमला हुआ तो यह ग्रुप्स बेकाबू हो जाएंगे। लेबनान में हिज्बुल्लाह के पास 1 लाख से ज्यादा मिसाइल्स हैं और उनका पहला निशाना क्या होगा? इजराइल और उसी टाइम यमन में होते रेड सी एरिया में बची हुई शिपिंग पर ड्रोंस और मिसाइल से हमला कर सकते हैं। अब अमेरिकन जनता भी इन जंगों से तंग आ चुकी है। हमने हाल ही में देखा है कि कैसे अमेरिका में आज तक का सबसे बड़ा प्रोटेस्ट हुआ। जहां पब्लिक सीधे अपने ही राष्ट्रपति के खिलाफ हो गई थी। अमेरिका में चुनाव होते हैं और कोई भी नेता अपनी कुर्सी दाव पर लगाकर आम जनता की मर्जी के खिलाफ कोई नई ट्रिलियन डॉलर की जंग नहीं छेड़ना चाहेगा। समझदार लोग जानते हैं कि न्यूक्लियर वेपन्स का असली काम उन्हें चलाना नहीं है।
उनका असली काम है दुश्मन देशों में डर बनाकर रखना। आपको क्या लगता है कि ट्रंप समझदारी दिखाएंगे और इस सीज फायर को बनाए रखेंगे या दुनिया को एक बड़ा झटका लग सकता है? दूनिया के कई देश है उन सब के पास न्यूक्लियर हथियार हैं लेकिन सबसे ज्यादा किसके पास हैं? वो देखें तो नंबर 9 नाइन पर आता है अपने गोलू मोलू का देश नॉर्थ कोरिया उसके पास ऑलरेडी 50 न्यूक्लियर हैं लेकिन यह और बनाना चाहते हैं। नंबर 8 पर एट इज़राइल है। इसके पास 90 न्यूक्लियर हैं लेकिन ये कभी खुद कुबूल नहीं करता। नंबर 7 सेवन पर पाकिस्तान है। पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर हैं। नंबर 6 सिक्स हमारे देश इंडिया के पास भी 180 न्यूक्लियर मौजूद हैं।
नंबर 5 फाइव पर यूनाइटेड किंगडम यानि ब्रिटेन। इसके पास लगभग 225 न्यूक्लियर मौजूद हैं। नंबर 4 फोर पर है फ्रांस। जिसके पास 290 से 370 न्यूक्लियर बताए जाते हैं। नंबर 3 थ्री पर चाइना है। इन जनाब के पास 600 न्यूक्लियर ऑलरेडी हैं मगर ये तेजी से और डेवलप कर रहा है। नंबर 2 टू पर अमेरिका है। उसके पास 5,170 न्यूक्लियर हैं और अब नंबर 1 वन पर आते हैं पुतिन रशिया का बादशाह। इनके पास सबसे ज्यादा अराउंड 5,459 न्यूक्लियर मौजूद हैं। (Photos Courtesy Social media)
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