*ईरान-US जंग की आहट:'बात मानो वरना बर्बादी तय',ट्रंप की आखिरी चेतावनी और पाकिस्तान का 'डबल गेम'*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई

*ईरान-US जंग की आहट:'बात मानो वरना बर्बादी तय',ट्रंप की आखिरी चेतावनी और पाकिस्तान का 'डबल गेम'*/रिपोर्ट स्पर्श देसाई 



(मुंबई/रिपोर्ट स्पर्श देसाई)मिडिल ईस्ट वॉर के मद्देनजर डील करो वरना तुम्हारी बर्बादी तय है ऐसी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। बुधवार को US और ईरान के बीच नाजुक सीज़फ़ायर खत्म होने के साथ US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि US डेलीगेशन सोमवार को दूसरे राउंड की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान को दिया गया प्रपोज़ल बहुत सही और फेयर है । मीठी- मीठी बातें खत्म हो गई हैं और अगर यह डील नहीं मानी गई तो खतरनाक हमले किए जाएंग हालांकि ईरान ने इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत में अपने रिप्रेजेंटेटिव भेजने से मना कर दिया है। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी 'तस्नीम' ने कहा है कि जब तक ईरान के खिलाफ US की लगाई गई नेवल नाकाबंदी रहेगी । तब तक बातचीत के लिए कोई डेलीगेशन पाकिस्तान नहीं भेजा जाएगा। वाइस प्रेसिडेंट जे.डी.वेंस और स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर,जिन्होंने पहले राउंड को लीड किया था । उसके नेतृत्व में US डेलीगेशन दूसरे राउंड में भी जारी रहेगा। डेलीगेशन सोमवार को इस्लामाबाद पहुंच रहा है। दौरान‘होर्मुज’ से भारतीय टैंकर बाहर निकल आया है। शनिवार को होर्मुज स्ट्रेट में फायरिंग के बाद भले ही दो भारतीय मर्चेंट शिप वापस लौट गए लेकिन एक भारतीय क्रूड ऑयल टैंकर सुरक्षित रूप से रास्ता पार करने में कामयाब रहा है। ‘शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ का शिप ‘देश गरिमा’ जिसमें 31 भारतीय नाविक थे । 18 अप्रैल को होर्मुज पार कर गया। यह शिप 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंच जाएगा। एक ओर चेतावनी ट्रंप की‘हम हर पावर प्लांट,पुल को तबाह कर देंगे’। ट्रंप ने रविवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करके ईरान को फिर से कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। अब जब मीठी-मीठी बातें खत्म हो गई हैं तो उन्होंने धमकी दी कि अगर ईरान ने हमारा प्रपोजल ठुकरा दिया तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर पुल को तबाह कर देगा। उधर ईरान भी मुश्किल में है अगर वे डील नहीं मानते हैं तो वे आसानी से टूट जाएंगे। डील के लिए जो जरूरी है वह करना मेरे लिए सम्मान की बात है। ट्रंप ने यह भी कहा कि पिछले 47 सालों में दूसरे प्रेसिडेंट्स ने वह नहीं किया जो उन्हें करना चाहिए था। दौरान भारत के बारे में सवाल पूछने पर ट्रंप ने पत्रकारों को कहा, गेट आउट। डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म करते हुए कहा कि जैसे ही एक महिला पत्रकार ने होर्मुज स्ट्रेट में दो जहाजों पर ईरानी हमले के बारे में सवाल पूछा। वह बाहर निकल जाए। CBS न्यूज़ की रिपोर्टर ओलिविया रिनाल्डी ने ट्रंप से भारतीय जहाज पर हमले के बारे में सवाल पूछा था। इसका जवाब देने के बजाय ट्रंप ने अपना गुस्सा दिखाया और सभी पत्रकारों को तुरंत जाने का आदेश दिया। पाकिस्तान ईरान के साथ मध्यस्थता के बहाने अमेरिका से एक बड़ा पैकेज हासिल करने की योजना बना रहा है । उसने पहले भी दो बार अपनी जेबें भरी हैं। मध्यस्थता के बहाने 'फायदा उठाने' की पाकिस्तान की बड़ी चाल । उसने पहले भी दो बार अपनी जेबें भरी हैं। पाकिस्तान समाचार देखें तो ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि शांति वार्ता की मेज़बानी के बदले संयुक्त राज्य अमेरिका उन्हें एक बड़ा 'इनाम' देगा। मध्यस्थता के बहाने 'फायदा उठाने' की पाकिस्तान की बड़ी चाल। उसने पहले भी दो बार अपनी जेबें भरी हैं । 



जैसे ही संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बेहद नाज़ुक संघर्ष विराम बुधवार को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के दूसरे दौर के लिए पाकिस्तान आ रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक परोक्ष चेतावनी भी जारी की है । जिसमें कहा गया कि ईरान को दिया गया प्रस्ताव "बेहद उचित और निष्पक्ष" है लेकिन अब "शिष्टाचार की बातें करने का समय समाप्त हो गया है"। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता स्वीकार नहीं किया जाता है तो अमेरिका विनाशकारी हमले करेगा। इस स्थिति के बीच यह आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान मध्यस्थता के बहाने अपनी जेबें भरने और आर्थिक लाभ उठाने का इरादा रखता है। दौरान ईरान ने इन वार्ताओं में अपने प्रतिनिधियों को भेजने से इनकार कर दिया है । जो इस्लामाबाद में होने वाली हैं। ईरान ने घोषणा की है कि जब तक संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लगाया गया। नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी रहता है। तब तक बातचीत के लिए पाकिस्तान में कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा जाएगा। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वैन्स कर रहे हैं। (जिन्होंने बातचीत के पहले दौर का भी नेतृत्व किया था) साथ ही विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं । बातचीत के इस दूसरे दौर के लिए अपरिवर्तित है। पाकिस्तान जो वर्तमान में आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने एक बार फिर अपनी पुरानी कूटनीतिक चालों का सहारा लिया है हालांकि पाकिस्तान को अमेरिका से एक बड़े इनाम की उम्मीद है। शहबाज़ सरकार को उम्मीद है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की पृष्ठभूमि में अमेरिका शांति वार्ता की मेज़बानी के बदले उन्हें एक बड़ा "इनाम"विशेष रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता देगा। पाकिस्तान के इतिहास पर नज़र डालें तो पता चलता है कि उसने लगातार अपने क्षेत्र और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल सौदेबाजी के हथियार के तौर पर किया है। पाकिस्तान को साल 1980 के दशक में और फिर साल 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका से अरबों डॉलर मिले थे। पाकिस्तान को इस बार भी इसी तरह की फंडिंग मिलने की उम्मीद है हालाँकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए। इस "सौदे" के सिरे चढ़ने की संभावना बहुत कम लगती है। जबकि क्षेत्रीय संघर्ष में पाकिस्तान के लिए कमाई का एक अवसर है। अतीत में जब भी इस क्षेत्र में संघर्ष छिड़ता था तो पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता, कर्ज़ माफ़ी और बिना शर्त अनुदान मिलता था। युद्ध असल में पाकिस्तान के लिए कमाई के अवसर बन जाते थे हालाँकि अब समय पूरी तरह बदल चुका है। इस साल 2026 की मौजूदा स्थिति अतीत के बिल्कुल विपरीत है। जहाँ पिछले संघर्षों ने पाकिस्तान के खजाने को भरने में मदद की थी । वहीं मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव उसके खजाने से अरबों डॉलर सोख रहे हैं। वही भौगोलिक स्थिति जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने कभी वैश्विक समुदाय से "किराया" वसूलने के लिए किया था। अब उसकी सबसे बड़ी देनदारी बन गई है। विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं, डॉलर का भंडार घट रहा है और मौजूदा कर्ज़ चुकाना अब और भी ज़्यादा नामुमकिन सा लग रहा है। एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश की पारंपरिक कूटनीतिक चालें उसकी अर्थव्यवस्था को बचाने में नाकाम साबित हो रही हैं। इस बीच जहाँ पाकिस्तान ने लगातार ऐसे अवसरों का फ़ायदा उठाया है । वहीं वह अंततः एक मज़बूत आर्थिक ढाँचा खड़ा करने में नाकाम रहा है। वह कभी भी इन अवसरों को ठोस व्यावसायिक समझौतों में बदलने में सफल नहीं हो पाया। वह कोई बड़ा तेल सौदा करने या महत्वपूर्ण विदेशी निवेश आकर्षित करने में विफल रहा। जब तक युद्ध चल रहा था। तब तक पैसों का प्रवाह जारी रहाहालाँकि जैसे ही स्थिति सामान्य हुई पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक बार फिर ढह गई। आर्थिक विशेषज्ञों ने तो "रेड अलर्ट" भी जारी कर दिया है । जिसमें चेतावनी दी गई है कि जब तक देश की भौगोलिक स्थिति को कमाई के ज़रिए में नहीं बदला जाता। तब तक उसे भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। विशेषज्ञ अब बारीकी से यह देख रहे हैं कि क्या अमेरिका एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाएगा या फिर पाकिस्तान को कमाई के नए रास्ते तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। (Photos Courtesy Social media)

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