मुंबई नगरी बनी गुनाहों की नगरी /रिपोर्ट स्पर्श देसाई

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मुंबई, /रिपोर्ट : स्पर्श देसाई
हिंदुस्तान के सुरक्षित शहरों में महाराष्ट्र के महानगर मुंबई को  सबसे सुरक्षित शहर माना गया हैं । लेकिन  इसी मुंबई  की सामाजिक संस्था "प्रजा फाउंडेशन" के आंकड़ों के अनुसार साल 2013 -14 से लेकर साल 2017- 18 तक मुंबई में रेप के केस में 83% की वृद्धि हुई हैं । हालांकि विधानसभा में  इस जानकारी की विगत पर कोई चर्चा नहीं हुई हैं । विधायकोने अब तक सिर्फ 9 बार रेप के मुद्दे पर सवाल उठाए थे । जबकि प्रजा फाउंडेशन के आंकड़े बताते हैं कि बलात्कार के साथ साथ लड़कियों की छेड़खानी और दंगल मचाने के केसों में क्रमशः 95% और 36% की वृद्धि हुई हैं । प्रजा फाउंडेशनने विधायको की जिम्मेवारी पर भी सवाल उठाए हैं ।
 बजट सत्र 2017 से लेकर 2018 के दौरान दक्षिण मुंबई से -5, उत्तर पूर्व मुंबई में से दो और उत्तर मुंबई में से दो बार विधायको ने  बलात्कार के मुद्दे पर सवाल किए थे । रेप केस में पिछले 4 साल में दक्षिण मुंबई से सबसे ज्यादा 172 % की वृद्धि हुई हैं । इसी तरह उतर पूर्व मुंबई में  99 % वृद्धि हुई हैं । जब की उतर मुंबई में 98 % वृध्दि हूई हैं ।
  मुंबईके शेष ईलाकों में छेड़खानी की घटनाओं में वृद्धि हुई हैं । सरकार के जरिए प्राप्त आंकड़ों के अनुसार छेड़छाड़ के गुनाहों में उत्तर मुंबई में 186 प्रतिशत की वृद्धि हुई हैं । उतर पश्र्चिम मुंबई में 148 और  उतर मध्य मुंबई 91 %   छेड़छाड़ के धटनाओं में  वृद्धि हुई हैं । 
जो पिछले 2 सालों में "पोस्को" को नानम कानून के तहत किए गए गुनाहों में भी 19 % की वृद्धि देखी गई हैं । 
हालांकि प्रजा फाउन्डेशन इस निष्कर्ष पर पहुंचा हैं कि मुंबई में बढ़ते हुए गुनाहों को लेकर पुलिस विभाग में पोलिसकर्मीयों की संख्या की कमी कारण भी हैं  और दूसरा कारण यह हैं कि   2018 जुलाई तक पुलिस विभाग में 22% की पुलिस कर्मीयों की कमी से गिरावट देखी गई थी ।
 एक दूसरे सर्वे के मुताबिक 24,290 परिवारों के लिए गए इंटरव्यू में 32 % लोगों ने पुलिस विभाग में विश्वास ना होने की बात बाहर आई थी । जबकि 23 % लोगों का मानना है कि पुलिस के साथ काम करना ज्यादा कष्टदायी हैं । जबकि 85 %  लोगों ने पुलिस के लफड़े से दूर रहने की बात कही थी ।        वास्तव में मुंबई में बढ़ रही जनसंख्या के साथ साथ गुनाहों के आंकड़े भी बढ रहे हैं । बढ़ती हुई जनसंख्या पर किसी का नियंत्रण नहीं हैं , पर पुलिस विभाग में कम पुलिस भर्तियों को लेकर विशेष ध्यान सरकार नहीं दे रही हैं । वह भी हकीकत हैं । जबकि हमारी पुलिस कानून से ज्यादा व्यवस्था में ज्यादा व्यस्त दिख रही हैं । हर त्यौहार पर निकलने वाले मोर्चों पर और वीवीआइपीओ की सुरक्षा से पुलिसकर्मियों को वक्त नहीं मिलता हैं । इसके उपरांत जनसंख्या के हिसाब से जितने पुलिसकर्मी पुलिस विभाग के पास होने चाहिए उतने ना होने से गुनहगारों को खुला मैदान मिल जाता हैं, और वह गुनाह करते हैं । इसके लिए सरकार को पुलिस विभाग में कम पुलिस कर्मियों की खाली जगह भरपाई करने के लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए और वीवीआईपीओ की सुरक्षा मैं लगाए हुए इन पुलिस कर्मचारियों की संख्या में कमी लानी चाहिए ।
•रिपोर्ट :स्पर्श देसाई  √•मेट्रो सिटी पोस्ट •के लिए...

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