फिल्म निर्माता राजकुमार बड़जात्या से जब मिले थे हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई/रिपोर्ट: अतुल देसाई

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मुंबई,/रिपोर्ट स्पर्श देसाई
इस साल फरवरी 22 तारीख को जब अखबार में यह खबर छपी कि राजश्री प्रोडक्शन के राजकुमार बड़जात्या की मृत्यु हार्ट अटैक की वजह से हुई हैं, तब हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई दहानूं में थे, और 4 दिन के बाद  वे जब से मुंबई वापस आए, तब उनको जानकारी मिली कि राजकुमार बड़जात्या जी अब हमारे बीच नहीं रहे तो उसको बड़ा झटका लगा क्योंकि वे राजकुमार जी से बेहद प्रभावित थे ।
हमारे पत्रकार पत्रकार स्पर्श देसाई उनको कई बार साहित्यिक कार्यक्रमों में मिल चुके थे । खासकर "आशीर्वाद" नामक डॉक्टर उमाकांत वाजपेई की सामाजिक संस्था के कार्यक्रम तहत, जो साहित्यिक कार्यक्रम होते थे, उसमें राजकुमार बड़जात्या की उपस्थिति निश्चित होती थी । राजकुमार बड़जात्या जी का रहन सहन और बहुत सादगी भरा था और ज्यादातर खामोश रहना पसंद करते थे । जब भी उनको माइक पर बोलने के लिए कहा जाता था तो बड़े प्यार से ना कह देते थे । कहते थे मेरे सामने इतने बड़े दिग्गज कवि, लेखक एवं पत्रकार लोग हैं , उसके बीच में मैं क्या बोल सकता हूं ? मैं तो एक साधारण सा आम आदमी हूं । उनके विचार उच्च रहते थे । हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई ने उनको खंगालने  कोशिश की थी । तब उन्होंने कहा था कि मैं मीडिया से ज्यादातर दूर रहता हूं । मुझे साहित्य अच्छा लगता हैं, इसीलिए मैं साहित्यिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहता हूं । डॉ.उमाकांत बाजपाई जी मेरे परम मित्र हैं । वह निमंत्रण देते हैं, तो मैं आ जाता हूं । जब हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई ने उनको पूछा कि आजकल राजश्री प्रोडक्शन के तहत फिल्में बनना कम क्यों हो गई ? तो उन्होंने बड़े प्यार से कहा था कि आजकल फिल्मों से ज्यादा लोग टीवी देखना पसंद करते हैं तो हमारे लड़के लड़कियां प्रोडक्शन में टीवी सीरियल बनाने लगे हैं और उसको टीवी पर दिखाया जाता हैं ,लोग हमारी टीवी सीरियल को पसंद करते हैं क्योंकि हमारी सिरीयल भी राजश्री प्रोडक्शन हाउस की परंपरा के अनुसार बनती हैं ।
आगे उन्होंने कहा था कि "ऐसा नहीं है कि हमलोग फिल्म बनाना नहीं चाहते हैं ? पर कोई स्टोरी हमें उपलब्ध नहीं हो रही हैं, इसलिए फिर भी एक फिल्म बनाने की सोच रहे हैं ,जो हमारी पूरानी फिल्म की रिमेक होगी । यह बात साल 2016 के अप्रैल महीने की हैं, जहां "आशीर्वाद "के कार्यक्रम में गोरेगांव में वह हमें मिले थे और उन्होंने हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई के साथ बात की थी ।
यहां डॉक्टर उमाकांत वाजपेई की एक किताब के ऊपर परिचर्चा का कार्यक्रम था और इसी कार्यक्रम में  चीफ गेस्ट के तौर पर  राज कुमार बरजात्या जी उपस्थित रहे थे । तब उन्होंने बताया था कि "एक या दो साल में हमारे एक नई फिल्म आ रही हैं ।"
मजे की बात यह हैं कि इस कार्यक्रम में उद्योगपति फिल्म कलाकार लोग, कवि, लेखक और पत्रकार इन पांचों लोगों का संगम देखने को मिला था । जिसमें उद्योगपति बृजमोहन अग्रवाल, फिल्म कलाकार अखिलेश मिश्रा, अंजन श्रीवास्तव, विष्णु शर्मा, टीवी सीरियल अभिनेत्री हेमा चंद्रा अंजूली, लेखिका अलका अग्रवाल ,डॉक्टर बघेलजी,हास्य कवि सुभाष काबराजी, डॉक्टर बनवारीजी, संचालक अनंत श्रीमालीजी, कवि रवि यादव,  कवि लक्ष्मण दुबेजी, लेखिका संगीता वाजपेईजी, फोटोग्राफर अतुल देसाई , पत्रकार अभिजीत राणे और हमारे पत्रकार स्पर्श देसाईजी जैसे जाने माने लोग उपस्थित थे ।
इस कार्यक्रम में दूसरे कई और लोग भी हाजिर थे जिसमें एक नेता भी थे, जो यूपी बिहार के सांसद थे ।
मुंबई में ऐसे कई साहित्य कार्यक्रमों में राजकुमार बड़जात्याजी उपस्थित रहते थे । जिससे कार्यक्रम की रौनक बन जाती थी ।
वह खासकर "आशीर्वाद" के कार्यक्रम में तो अचूक उपस्थित रहते थे ।
राजश्री प्रोडक्शन की स्थापना राजकुमार बड़जात्या जी के पिता जी ताराचंद बड़जात्याजी ने की थी और इसी बैनर के तले उन्होंने कई हिट फिल्में भी दी थी । इस बैनर के तले सबसे पहली फिल्म जो थी,  उसका नाम" दोस्ती "था । जिसके गाने आज भी लोग गा रहे हैं । इसके बाद इस बैनर के तले जो फिल्म में आए उनमें से फरीदा जलाल को लॉन्च करने वाली फिल्म" तकदीर" थी । धर्मेंद्र और शत्रु सिन्हा की फेमस फिल्म "ब्लैकमेल" थी ।  "जीवन मृत्यु" बाद में "नदिया के पार", "चितचोर", "अंखियों के झरोखों से"," दुल्हन वही जो पिया मन भायें", "गीत गाता चल", "हम साथ साथ हैं", "हम आपके हैं कौन?", "मैने प्यार किया", "विवाह", "प्रेम रतन धन पायो" और अभी अभी आई "चार यार" फिल्में हैं जो बहुत ही लोकप्रिय हूई थी  ।
राजकुमार बड़जात्याजी का देहांत दिनांक 21 फरवरी गुरुवार सुबह 9:04 पर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में हुआ था । उनकी उम्र 77 साल थी । उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को ही वर्ली की शमशान भूमि में किया गया था । तब उनके अंतिम संस्कार में पूरा बॉलिवुड बड़ा था । इसी से उनकी लोकप्रियता का अंदाज मिलता हैं ।  वह बेहद सादगी पूर्वक जीवन जीने वाले इंसान थे । उनका व्यक्तित्व आकर्षक व्यक्तित्व प्रभावशाली था । ज्यादातर खामोश रहने वाले राजकुमार जी बहुत कम बात करते थे, पर जब भी बात करते थे बड़े प्यार से बात करते थे ।
राजकुमार बड़जात्या जी फिल्मी इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, उसके बावजूद वह बहुत कम फिल्मी समारोह में उपस्थित रहते थे, पर शहर में जहां भी साहित्यिक कार्यक्रम होता था, वहां वह अचूक मौजूद रहते थे ।
हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई ने उनको कई साहित्य सम्मेलनों में देखा था । उनसे बातें भी की थी । हर बार वह बड़ी सरलता से पेश आए थे । उनका मृदु स्वभाव और आकर्षक पर्सनालिटी  के कारण वे सब की नजर में लोकप्रिय थे ।
ऐसे सादगी सभर इंसान को हमारे पत्रकार स्पर्श देसाई और हमारी "मेट्रो सिटी पोस्ट न्यूज़ चैनल "की पूरी टीम उनको भावभरी  श्रद्धांजलि देते हैं ।

रिपोर्ट अतुल देसाई√•Metro City Post• के लिए...


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