√• मुंबई में कुल 188 एल.पी.सी.डी -लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन- पानी की आपूर्ति होती है, जो बी.आई.एस के 135 एल.पी.सी.डी मानदंडों से अधिक है/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
√• मुंबई में कुल 188 एल.पी.सी.डी -लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन- पानी की आपूर्ति होती है, जो बी.आई.एस के 135 एल.पी.सी.डी मानदंडों से अधिक है/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】 प्रजा फाउंडेशन ने मंगलवार, 8 जून, 2021 को 'मुंबई में नागरिक मुद्दों की स्थिति' पर अपनी एक मुंबई में रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में वर्ष
2020-21 में मुंबई में जल, स्वच्छता और एस.डब्ल्यू.एम सहित सेवा वितरण की स्थिति का विश्लेषण किया गया है ।
"2020 दुनिया के लिए एक असाधारण वर्ष था । कोविड -19 महामारी ने शहरों के लिए विभिन्न चुनौतियां पैदा की और मुंबई कोई अपवाद नहीं था। बृहन मुंबई महानगरपालिका (एम.सी.जी.एम) द्वारा उपयुक्त महामारी से निपटने के प्रयासों को प्रजा सराहता है। नागरिक निकाय द्वारा की गयी विभिन्न उल्लेखनीय पहल भी सराहनीय है ।”प्रजा फाउंडेशन की ट्रस्टी निताई मेहता ने कहा।
इस अवधि के दौरान, एम.सी.जी.एम ने सफलता पूर्वक शहर के प्रत्येक 24 वार्डों (COVID-19 युद्ध कक्षों) में कमांड पदों के साथ विकेंद्रीकृत नियंत्रण कक्षों को स्थापित किया । इसके अलावा, एक और बात जो उनके पक्ष में काम आई, वह प्रौद्योगिकी का उपयोग था । एम.सी.जी.एम. ने कोविड कॉल सेंटर के रूप में, 1916 कॉल सेंटर- एक एकीकृत शिकायत प्रणाली को पुनः शुरू किया। वास्तव में, 1916 कॉल सेंटर 2003 में प्रजा द्वारा रचा गया था।
" देश की आर्थिक राजधानी होने के नाते, मुंबई को कुशलतापूर्वक चलना चाहिए और उसके नागरिक प्रतिदिन उचित सेवाओं के योग्य हैं। प्रजा फाउंडेशन समझता है कि इस वर्ष, कोविड -19 की ओर प्रमुख ध्यान केंद्रित होने के कारण,नागरिकों के बहुत मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा सका, और यह हमारी सिविक रिपोर्ट में भी परिलक्षित हुआ है ।" मेहता ने कहा।
2020 में, कचरा एकत्र नहीं होने की 3943 शिकायतें प्राप्त हुई, हालांकि निगम ने एम.सी.जी.एम रिपोर्ट में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हासिल करने का दावा किया है। आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि, एम.सी.जी.एम ने 2020 में पानी की शिकायत हल करने के लिए औसतन 29 दिन और सभी एस.डब्ल्यू.एम. शिकायतों को हल करने के लिए 43 दिन का समय लिया।
"एम.सी.जी.एम सर्वेक्षण 2015 से यह भी पता चला था कि 58% शौचालयों में बिजली नहीं थी, जो सुरक्षा का एक प्रमुख विषय है । हालांकि, 2015 के बाद, वर्तमान परिदृश्य समझने के लिए कोई अनुवर्ती सर्वेक्षण नहीं किया गया है। एम.सी.जी.एम को नियमित अंतराल में, 2015 जैसे सर्वेक्षण का संचालन करना चाहिए ताकि नागरिक मुद्दों, शिकायतों और उनके निवारण की प्रगति के आंकड़ों का मिलान किया जा सके ।” प्रजा फाउंडेशन के निदेशक मिलिंद म्हस्के ने कहा ।
"इसके अलावा, जब पानी की आपूर्ति की बात आती है तो मुंबई को औसतन कुल 188 एल.पी.सी.डी (लीटर प्रति दिन प्रति व्यक्ति) मिलता है, जो भारतीय मानक ब्यूरो (बी.आई.एस) मानदंड 135 एल.पी.सी.डी से अधिक है। इसमें से मीटर कनेक्शन द्वारा, गैर मलिन बस्ती क्षेत्रों को 150 एल.पी.सी.डी (19.44 रुपये प्रति माह) जबकि मलिन बस्ती क्षेत्रों को 45 एल.पी.सी.डी (4.85 रुपये प्रति माह) मिलता है। पानी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, बस्तियों में लोगों को पानी के टैंकरों और अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमे उन्हें प्रतिमाह लगभग 500-550 रुपये की लागत है । यदि एम.सी.जी.एम., मीटर कनेक्शन द्वारा बस्ती की आबादी को 135 एल.पी.सी.डी (बी.आई.एस मानकों के अनुसार) पानी की आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम है, तो लागत 14.54 रुपये प्रति माह तक कम होगी। मलिन बस्तियों में 100% पानी के मीटर के कनेक्शन को लागू करने से उन्हें मात्र 14.54 रुपये प्रति माह में आवश्यक मात्रा में पानी मिलेगा, जहाँ वह वर्तमान में 500-550 रुपये का भुगतान कर रहे हैं। " म्हस्के ने जोड़ते हुए कहा ।
बजट स्थानीय सरकार द्वारा विकास के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चित्रण करता है और कई नागरिक कार्यों के लिए आवंटित धन पर प्रकाश डालता है । हालांकि, 2015 के बाद बजट अनुमानों और संशोधित अनुमानों के बीच अंतर देखा गया है, जहां पूंजी बजट, बजट अनुमानों की तुलना में लगातार कम रहा है ।शहर में, लक्षित विकास सुनिश्चित करने के लिए, एक परिणाम आधारित बजट शामिल किया जाना चाहिए ।
"एम.सी.जी.एम ने, पिछले कुछ वर्षों की तरह, इस साल भी बजट घोषणा को लाइव-स्ट्रीम किया, इस प्रकार नागरिकों को बजट की प्रक्रिया से अवगत करा रहे हैं । हालांकि, अगर नागरिक बजट की विभिन्न बारीकियों को समझने में सक्षम नहीं हैं, तो यह कोई विशिष्ट उद्देश्य को पूरा नहीं करता। बजट ढांचे को सरल बनाने की आवश्यकता है, जिसके द्वारा आम नागरिक को समझने में आसानी हो ।" मेहता ने कहा ।
“यह भी महत्वपूर्ण है कि वार्ड समितियों को सक्रिय किया जाए और उनका सदुपयोग किया जाए। इसके लिए, तकनीक/टेक्नोलॉजी का प्रयोग परिवर्तनकरी हो सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2017-2019 में हर महीने औसतन 22 बैठकें आयोजित की गईं, लेकिन अक्टूबर-दिसंबर, 2020 में जब वार्ड समितियों की ऑनलाइन बैठक शुरू हुई, तो हर महीने औसत संख्या बढ़कर 28 हो गईं। यह दर्शाता है कि बैठकों की संख्या बढ़ाने में, नई प्रौद्योगिकी के अनुकूल और आभासी बैठकों का आयोजन, फायदेमंद हो सकता है । इससे स्थानीय सरकार अपने समुदाय के हितों और मुद्दों का प्रतिनिधित्व बेहतर कर सकती है ।”म्हस्के ने कहा ।
निताई मेहता ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "एम.सी.जी.एम के कोविड-19 प्रबंधन के दौरान, सफलताओं के तीन प्रमुख क्षेत्र प्रकाश में आए, जिन्हें महामारी के बाद पुनर्निर्माण में आगे बढ़ाया जा सकता है और वार्ड स्तर पर सेवाओं में और सुधार लाया जा सकता है । पहला, समावेशी निर्णय लेने और सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न कार्यों का विकेंद्रीकरण । दूसरा, प्रौद्योगिकी का और अधिक व्यापक उपयोग, जिसके लिए एम.सी.जी.ए.म ने पहले (लाइवस्ट्रीमिंग बजट, ऑनलाइन वार्ड समिति की बैठकों आदि) भी एक झुकाव दिखाया है। तीसरा, एम.सी.जी.एम. को, शहर के विकास के लिए अभिनव समाधान खोजने के लिए, सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में विभिन्न हित धारकों के साथ सहयोग करना चाहिए । इससे न केवल एम.सी.जी.एम को प्रतिदिन मूलवर्ती सेवाओं को कुशलतापूर्वक प्रदान करने में मदद मिलेगी बल्कि भविष्य के लिए तैयार शहर का प्रबंधन सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।
प्रजा फाउंडेशन के बारे में:
शासन में उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता को पुनः स्थापित करने के लक्ष्य के साथ वर्ष 1997 में प्रजा का गठन किया गया था। स्थानीय सरकार में जनता की घटती अभिरुचि की समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रजा नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए प्रयासरत है, और इसलिए उन्हें ज्ञान के माध्यम से सशक्त बनाना चाहता है । प्रजा का मानना है कि, लोगों के जीवन को सरल बनाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में जानकारी की उपलब्धता का अहम योगदान है। यह एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए सुशासन कायम करने की दिशा में निर्वाचित प्रतिनिधियों तक जनता के विचारों को पहुँचने को सुनिश्चित करना चाहता है। इसके साथ-साथ ऐसी युक्तियाँ और तंत्र भी अवश्य मौजूद होने चाहिए, जिसकी मदद से जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किये गए कार्यों पर कड़ी नजर रखने में सक्षम हो सके। लोगों के जीवन को सरल बनाना, तथ्यों के माध्यम से जनता एवं सरकार को सशक्त करना तथा भारत की जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए परिवर्तन की युक्तियों का निर्माण करना प्रजा के लक्ष्य रहे हैं। प्रजा लोगों की भागीदारी के माध्यम से एक जवाबदेह एवं कार्यक्षम समाज के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध है ।【Photo Courtesy Google】
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#प्रजा#मुंबई बीएमसी


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