√• बिना चर्चा के 15-20 मिनट में *संसद* में बिना बहस पास हुए कई *बिल,* जानिए,उन बिलों के बारे में / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

√• बिना चर्चा के 15-20 मिनट में *संसद* में बिना बहस पास हुए कई *बिल,* जानिए,उन बिलों के बारे में / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
 
 
【मुंंबई /रिपोर्ट स्पर्श देसाई】संसद का मानसून सत्र जुलाई से शुरू हो गया है,तब से संसद के दोनों सदनों को सदन में लगातार गड़बड़ी के कारण स्थगित कर दिया गया है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और सरकार को घेरने के लिए संसद में इस पर चर्चा करना चाहता है लेकिन विपक्ष सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं है । इस बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अब तक दस से अधिक बार स्थगित की जा चुकी है हालांकि सरकार ने सदन में कुछ विधेयक भी पारित किए हैं। अधिकांश विधेयक सदन में बिना बहस के पारित हो गए हैं।  कुछ विधेयकों पर विपक्ष ने आपत्ति जताई गई है। सरकार के मुताबिक इस संसद में अब तक 13 बिल पास हो चुके हैं । इनमें *वित्त*, *कॉर्पोरेट मामलों*, *रक्षा*,*पर्यावरण* और *कृषि मंत्रालयों* से संबंधित बिल शामिल हैं। वित्त मंत्रालय से संबंधित विधेयकों की संख्या पारित विधेयकों की संख्या से अधिक है। बिना चर्चा के पारित हुए विधेयक बिल । ध्यान दें कि मोदी सरकार ने संसद के इस सत्र में कुल 31 विधेयक पेश करने की योजना बनाई थी। जिनमें से 13 बिल लोकसभा या राज्यसभा में पेश और पारित किए जा चुके हैं इसलिए यहां यह जानना जरूरी है कि स्थगन और हंगामे के बीच सरकार ने संसद में बिना चर्चा के कौन से विधेयक पारित किए हैं?

 1. *किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक*, 2021: यह विधेयक मार्च में लोकसभा के बजट सत्र में पारित हुआ और 28 जुलाई को राज्यसभा में पारित हुआ। बिल जिला और अतिरिक्त जिलाधिकारियों को बच्चे को गोद लेने के आदेश जारी करने और विभिन्न *बाल कल्याण प्राधिकरणों*के प्रदर्शन की समीक्षा करने का अधिकार देता है। इसमें *बाल कल्याण समिति* और *जिला बाल संरक्षण इकाई* का कार्य भी शामिल है।  यह कुछ अपरिभाषित अपराधों को भी वर्गीकृत करता है जो न्यूनतम सजा का वर्णन नहीं करते हैं।

 2. *फैक्टरिंग अमेंडमेंट बिल*, 2021: इस बिल को संसद में महज15 मिनट में पास कर दिया गया।  इसे 28 जुलाई को राज्यसभा में पेश किया गया था। विधेयक का उद्देश्य *सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र* की मदद करना है।  इसे एक सप्ताह पहले पेश किया जाना था लेकिन विपक्ष ने *पेगासस* मुद्दे पर बहस की मांग को लेकर संसद में हड़कंप मचा दिया इसलिए इसे उस समय पेश नहीं किया जा सका।

 3. *सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक*, 2021: इसे लोकसभा में 30 जुलाई को और राज्य सभा में 2 अगस्त को पारित किया गया है।  बिल सरकार को *सार्वजनिक क्षेत्र* की *बीमा कंपनियों* में अपनी हिस्सेदारी कम करने की अनुमति देता है।
 इसका मतलब है कि सरकार को विनिवेश की अनुमति दी जाएगी।  इससे सरकार को अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।  इससे सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने में मदद मिलेगी।हालांकि सरकार ने कहा है कि इससे राजस्व बढ़ेगा लेकिन विपक्ष इसके खिलाफ है । विपक्षी दलों ने कहा है कि वे उपचुनाव में नहीं लड़ेंगे।

 4. *ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल*, 2021: विपक्ष के सरकार से बिल पर बहस करने की जिद के बावजूद 2 अगस्त को बिना चर्चा के *लोकसभा* में बिल पास हो गया। विधेयक का उद्देश्य *न्याय प्रणाली* को और *अधिक समान बनाने* के लिए विभिन्न कानूनों में संशोधन करके विभिन्न कानूनों के तहत न्यायाधिकरणों या प्राधिकरणों को समाप्त करना है। इनमें *सिनेमैटोग्राफी अधिनियम*, *कॉपीराइट अधिनियम*, *सीमा शुल्क अधिनियम*, *पेटेंट अधिनियम*, *भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम*, *ट्रेडमार्क अधिनियम और माल का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम* शामिल हैं। सरकार का कहना है कि बहुत अधिक ट्रिब्यूनल होने से *मुकदमेबाजी* का एक अतिरिक्त स्तर जुड़ जाता है।

 5. *दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक*, 2021: इस विधेयक को कल राज्यसभा में पारित किया गया। इसे जुलाई में लोकसभा में पारित किया गया था।  इसमें आधिकारिक कार्यवाही शुरू होने से पहले *लेनदार* और *देनदार* के बीच बातचीत से समझौता करने की योजना शामिल है। सरकार का कहना है कि वह आधिकारिक कार्रवाई को और अधिक कुशल, तेज और अधिक लागत प्रभावी बनाएगी। इसमें न्यूनतम रु.10 लाख की *डिफ़ॉल्ट सीमा* है।  यानी कर्ज की सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है । यह असंबंधित वित्तीय लेनदारों और *बहुसंख्यक शेयरधारकों* के स्वामित्व में है। शेयरधारकों की 66% सहमति के साथ आयोजित किया जाएगाऔर पूरी प्रक्रिया 120 दिनों में पूरी हो जाएगी।

 6. *अंतर्देशीय पोत विधेयक* 2021: यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पारित हो चुका है। *केंद्रीय बंदरगाह*, *नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल* ने बिल पेश किया। इसका उद्देश्य देश में *अंतर्देशीय जलमार्ग से संबंधित कानून प्रवर्तन* और *नेविगेशन मुद्दों में एकरूपता* लाना है।  हालांकि विपक्ष ने इसका विरोध किया लेकिन इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

 7. *जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक*, 2021: इसे 30 जुलाई को संसद में पेश किया गया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 में संशोधन को मंजूरी दी जिसे इस *अधिनियम* में संशोधन के लिए एक विधेयक के रूप में पेश किया गया था।  सरकार का कहना है कि अब यदि *बैंकों का परिसमापन* होता है तो उनमें पैसा जमा करने वाले खाताधारकों को कम कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।  *केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण* ने फरवरी 2021 में *बजट* पेश करते हुए अपने भाषण में घोषणा की थी कि बैंकों में जमा राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाएगा। पिछली सीजन में उन्हें रिलीज नहीं किया जा सका क्योंकि कोरोना के कारण सत्र छोटा कर दिया गया था।  हाल ही में *यस बैंक* और *लक्ष्मीविलास बैंक* जैसे निजी बैंक और *पंजाब* और *महाराष्ट्र सहकारी बैंक (पीएमसी बैंक)* जैसे वित्तीय संस्थान दबाव में आ गए, जिससे उपभोक्ता फंस गए। यहां ध्यान दें कि (डीआईसीजीसी) निगम पूरी तरह से देश के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधीन काम करता है।
 जिसके माध्यम से देश के सभी वाणिज्यिक बैंकों और भारत में विदेशी बैंकों की शाखाओं के बचत खाते, चालू खाते या आवर्ती खाते में जमा राशि पर बीमा कवर दिया जाता है। जमा की दर रु.  इस निगम को बैंकों द्वारा 100 पर 10 पैसे का *प्रीमियम* दिया जाता है। इसे बढ़ाकर 12 पैसे कर दिया गया है, जिसे अधिकतम 15 पैसे तक बढ़ाया जा सकता है। नए प्रावधान के तहत खाताधारक को 90 दिनों के भीतर पांच लाख रुपये तक वापस मिलेंगे। पुरानी व्यवस्था के तहत इस प्रक्रिया में आठ से 10 साल लग जाते थे। हालांकि *कांग्रेस नेता अधीरंजन चौधरी* ने पूरे बिल और *ऑपरेशन* को लेकर सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने एक के बाद एक बिल को बुलडोजर की तरह पास किया है।  हम चर्चा करना चाहते थे लेकिन पहले केवल *पेगासस* पर। इसके अलावा सरकार ने *संविधान* (अनुसूचित जनजाति) *आदेश* (संशोधन) विधेयक, 2021,*सीमित देयता भागीदारी* (संशोधन) विधेयक, 2021, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सामान्य और गुणवत्ता प्रबंधन, विधेयक, 2021, अधिनियमित किया है। आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, 2021, *विनियोग* (नंबर 4) विधेयक, 2021, विनियोग (नंबर 3) विधेयक, 2021 भी *संसद* में पेश और पारित किया गया है। 【Photo Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post•News Channel•#विधेयक
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