√• राजयोग, गजकेसरी योग में रक्षाबंधन का पर्व रविवार को, प्रदोषकाल में राखी बांधना रहेगा श्रेष्ठ /रिपोर्ट स्पर्श देसाई
√• राजयोग, गजकेसरी योग में रक्षाबंधन का पर्व रविवार को, प्रदोषकाल में राखी बांधना रहेगा श्रेष्ठ /रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】रक्षाबंधन का पर्व विभिन्न योग संयोगों में 22 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक रक्षाबंधन पर *भद्रा का साया नहीं* होने से दिनभर राखी बंध सकेगी। *परकोटे*, *टोंक रोड*, *राजापार्क*, *मानसरोवर*, *मालवीयनगर*, *प्रतापनगर*, *वैशालीनगर* सहित अन्य जगहों पर बाजारों में राखियों की खरीददारी पूरी तरह से परवान पर है। *खासतौर पर बच्चों के लिए म्यूजिकल, कार्टून करेक्टर की राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई है*। इनकी कीमत 10 से लेकर 250 रुपए तक है। *नाहर गढ़* के दुकानदारों के मुताबिक कोरोना का संक्रमण कम होने के चलते इस बार बिक्री बढ़ी है।
*प्रदोषकाल में राखी बांधना श्रेष्ठ*
*ज्योतिषाचार्य पं.सुरेश शास्त्री* के मुताबिक रक्षाबंधन के पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा। दिनभर राखी बांधी जा सकेगी, इसके साथ ही ग्रहों के संयोग और योग पर्व की महत्त को शुभता प्रदान करेंगे। *भद्रा सुबह 6 बजकर 13 मिनट तक ही है। दोपहर एक बजकर 46 मिनट तक और प्रदोष काल के समय शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 08 मिनट तक राखी बांधने का समय शास्त्र सम्मत होगा। साथ ही अभिजित मुहूर्त दोपहर 12.04 बजे से 12.55 बजे भी राखी बांधी जा सकेगी।*
शास्त्री ने बताया कि राखी पर इस बार *चंद्रमा कुंभ राशि में मौजूद* रहेंगे और *गुरु कुंभ राशि में ही वक्री चाल* में मौजूद है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार *गुरु और चंद्रमा* की इस युति से रक्षाबंधन पर गजकेसरी योग का निर्माण होगा। साथ ही *राजयोग* भी रहेगा। वहीं सूर्य, मंगल और बुध तीनों एक साथ सिंह राशि में मौजूद रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार *रक्षाबंधन के दिन तीन ग्रहों का ऐसा संयोग 200 से अधिक साल* बाद होगा।*रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, पूरे दिन बांधी जा सकेगी राखी* । 22 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन पर्व ।
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व 22 अगस्त को मनेगा। इस दिन भद्रा नहीं होने से पूरे दिन पर्व रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार 474 साल बाद गजकेसरी योग और धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन पर्व आया है। इस दिन शुभ फल देने वाले ग्रह योग रहेंगे। लोक जीवन में यह *भाई-बहन का त्योहार* है। शास्त्रीय परंपरा में इसमें रक्षासूत्र का बंधन होता है। यह रक्षासूत्र पहनने वाले की रक्षा के लिए होता है, न कि पहनाने वाले की रक्षा के लिए। *पं. मनु मुदगल* ने बताया कि रक्षाबंधन पर भद्राकाल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखा जाता है।
भद्राकाल और राहुकाल में राखी नहीं बांधी जाती है, क्योंकि इन काल में शुभ कार्य वर्जित हैं। इस बार राखी पर भद्रा नहीं है। *भद्रा काल 23 अगस्त सुबह 05.34 से 06.12 तक होगा* और *22 अगस्त को पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी*। भद्रा के बारे में कहा जाता है कि *रावण ने भद्रा मुहूर्त में ही बहन से राखी बंधवा ली थी। एक साल बाद उसके कुल समेत सबका विनाश हो गया।* शास्त्रों के अनुसार भद्रा शनि देव की बहन है। जिन्हें ब्रह्माजी से शाप मिला था कि जो भी इस मुहूर्त में शुभ कार्य करेगा, वह अशुभ माना जाएगा।
*पं. राममोहन शर्मा* ने बताया कि इसमें परा व्यापिनी तिथि ली जाती है। यदि वह दो दिन हो, या दोनों दिन न हो, तो पूर्वा लेनी चाहिए। यदि इसमें भद्रा आ जाए तो उसका त्याग किया जाता है। *भद्रा में श्रावणी एवं फाल्गुनी* दोनों वर्जित है, क्योंकि *श्रावणी में राजा का एवं फाल्गुनी में प्रजा का नाश* होता है। व्रत करने वाले सुबह स्नान के बाद देवता, ऋषि एवं पितरों का तर्पण करें दोपहर के बाद *ऊनी, सूती, रेशमी पीला वस्त्र लेकर उसमें सरसों, केसर, चंदन, चावल, दूर्वा एवं स्वर्ण* रखकर बांध लें। एक कलश की स्थापना कर उस पर रक्षासूत्र को रख विधिवत पूजन करें तथा उसके बाद ब्राह्मण से रक्षासूत्र को दाहिने हाथ में बंधवा लें। यह रक्षा सूत्र एक वर्ष पर्यंत उसकी रक्षा करता है।
*रक्षाबंधन की कथा*
देवासुर संग्राम में देवताओं को पराजित होना पड़ा। इंद्र व अन्य देवता दु:खी एवं चिंतित हो देव गुरु बृहस्पति के पास गए। इंद्र ने कहा न तो मैं यहां सुरक्षित हूं ना यहां से जा सकता हूं। ऐसी दशा में मेरा युद्ध करना भी अनिवार्य है, जबकि हमारी लगातार हार हो रही है। यह बातें इंद्राणी ने भी सुनी, तब उसने कहा कल श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है, मैं विधि-विधान से रक्षा सूत्र तैयार करूंगी, उसे आप ब्राह्मणों से बंधवा लेना इससे आप की अवश्य विजयी होगी। दूसरे दिन इंद्र ने विधि-विधान से उस रक्षा सूत्र को धारण किया, इसके प्रभाव से उसकी विजयी हुई। तब से यह पर्व मनाया जाने लगा। इस दिन बहनें भाइयों को रक्षासूत्र बांधती है। इसी दिन से ब्राह्मण के बालक वेद पढऩा आरंभ करते हैंं। इस दिन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है।
*गुरु के साथ चंद्र का गोचर शुभ संयोग*
इस वर्ष रक्षाबंधन पर्व पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। सामान्यत: यह त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनता है। गुरु कुंभ राशि में वक्री है, उसके साथ में चंद्र का गोचर गजकेसरी योग का निर्माण कर रहा है। सूर्य, बुध एवं मंगल सिंह राशि में रहेंगे। सिंह सूर्य के स्वयं के स्वामित्व वाली राशि है, साथ में मंगल उसका मित्र है। शक्र मिथुन राशि में रहेगा। यह पर्व शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। ऐसा योग इससे पूर्व 474 साल पहले बना था। तब 11 अगस्त 1547 को रक्षा बंधन का पर्व मनाया गया था। उस समय भी धनिष्ठा नक्षत्र में उपरोक्त ग्रहों की युति बनी थी।
*राखी बांधने के शुभ मुहूर्त*
सुबह 9 से 10 बजे तक लाभ
सुबह 10.37 से दोपहर 12.13 तक अमृत
दोपहर 1.49 से 3.25 तक शुभ
(यह ज्योतिष शाश्त्रों पर आधारित लेख हैं । उन्होंने शाश्त्रों का आधार लेकर लिखा हैं । इससे चैनल सहमत हैं, ऐसा मानना जरुरी नहीं हैं।【Photo Courtesy Google 】
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#रक्षाबंधन

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