√• *कांग्रेस की छाया वर्माजी और फूलोदेवी नेतामजी और तृणमूल कांग्रेस की नेता के पर जो हमला हुआ,वो बहुत बुरा हुआ*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

  √• *कांग्रेस की छाया वर्माजी और फूलोदेवी नेतामजी और तृणमूल कांग्रेस की नेता के पर जो हमला हुआ,वो बहुत बुरा हुआ*/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】कांग्रेस के *वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे* ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी *लीडर उपराष्ट्रपति* जी को,जो हमारे राज्यसभा के चेयरमैन हैं, उनसे मिले और उनको हमने एक मेमोरेंडम पेश किया और उसमें ये बात सभी पार्टियों के *नेताओं* ने और *सीनियर लीडर शरद पवारजी* ने भी, हम सभी ने मिलकर जो सदन में घटनाएं घटी,उसके बारे में उनको सब विस्तार से बताया क्योंकि उनको जो मालूमात होती है या जो भी *इनफोर्मेशन* मिलती है, वो एक साइड ना हो तो इसलिए हम सभी लोग *मेमोरेंडम* लेकर पहुंचे। हम *धन्यवाद* करते हैं उपराष्ट्रपति जी का कि उन्होंने समय दिया और हमारी बात सुनी।
लेकिन उसमें यही बात हमने कही है कि सरकार ने जितने बिल हड़बड़ी में *हाउस ऑर्डर* में ना रहते हुए भी पास कर लिए । हर 10 मिनट में एक बिल पास हो गया और किसी को बोलने का मौका नहीं मिला और उन कानूनों में क्या कमियां हैं ? वो बताने के लिए भी समय नहीं दिया। उसके बाद में फिर भी हमने सरकार को *कोविड इश्यू* पर डिस्कशन के लिए पूरा साथ दिया। उसके बाद में जो *कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल* था । उसके विषय में भी 6 घंटे तक सभी स्तर से हमने बात की सभी पार्टी के लोगों ने भी बात करके सरकार को यानी इस कॉन्स्टिट्यूशन बिल को पूरा सपोर्ट किया। और जब पूरा सपोर्ट हमने किया, मकसद यही था कि *पार्लियामेंट स्मूथली* चले, *डेमोक्रेटिक* तरीके से चले और सब मिलकर *यूनेनिमस्ली* पास करने के लिए जो करेंगे, वो उसका *मैसेज* जनता तक पहुंचे, वही हमारी मंशा थी, वो हमने किया।
लेकिन हुआ क्या ? वो *कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल* पास होने के बाद उन्होंने फिर एक *बिल इशोंरेंस बिल डिनेशनलाइजेशन* 4 कंपनियों को उन्होंने जो किया। उसके विरोध में हमने ये कहा कि ये बिल आज तो आने वाला नहीं था क्योंकि कल हम सभी ने बात की थी । उनसे कि ये ओबीसी अमेंडमेंट एक्ट* पास होने के बाद हाउस आज *एडजर्न* करेंगे और इंशोरेंस बिल को कल लेंगे लेकिन इसके बावजूद वो लाए। वहाँ पर क्या हो गया कि हमेशा *प्रोटेस्ट होते* हैं, सदन में जाते हैं। कभी इमोशन में स्लोगन लगाते हैं लेकिन सरकार ने ऐसा इंतजाम कर लिया था। *लीडर ऑफ दी हाउस* ने ऐसा इंतजाम कर लिया था कि 50-60 *मार्शल्स* को बाहर से लाए। वो कौन थे? क्या थे ? किनको मालूम? उसी ढंग से 15-20 *महिलाओं* को भी वो लाए और सील बनाकर वहाँ पर खड़ा कर दिया और जो *कांग्रेस की दो महिला राज्यसभा सांसद* थी । *कांग्रेस की छाया वर्मा जी और फूलोदेवी नेतामजी* और उनके साथ *तृणमूल कांग्रेस की नेता* भी थी । उनके पर हमला हुआ इसलिए हम ये चाहते हैं कि कौन लाए वो बाहर की *फोर्सेस* को किसने इजाजत दी और *इतनी संख्या में सदन* में आने की क्या जरुरत थी? तो इसका कारण कौन है? किसने ये किया है? क्यों किया है और *अपोजिशन को बदनाम* करने के लिए ऐसी चीजें अगर सरकार करती गई और बाहर *मीडिया* में ऐसा *इंप्रेशन* देते हैं कि हम हाउस चलाना चाहते हैं । अपोजिशन पार्टियाँ नहीं चाहती है लेकिन अंदर जो होता हैं वो किसी को मालूम नहीं होता है। वो जो *प्रेस वार्ता* करके कहते हैं वही बाहर आता है और वही छपता है इसलिए हम आपको क्लेरिफाई कर रहे हैं कि सदन में जो चला,वो *अनडेमोक्रेटिक* था और खासकर के हड़बड़ी में जो *महत्वपूर्ण बिल* उन्होंने पास किए, वो भी अच्छा नहीं था। इसका हम खंडन करते हैं और इसकी जांच के लिए और जो सच्चाई है, वो बाहर आए।
जबकि *आनंद शर्मा* ने कहा कि ठीक है, विपक्ष के नेता ने क्या समझाया है ? हम विपक्षी दलों के फर्श के नेताओं को पूरा करने के लिए आए थे, जो कि *हाउस* में जो भी हुआ था,उस पर हमारे मजबूत विरोध को व्यक्त करने के लिए। *सरकार ने हर समझ का उल्लंघन* किया है कि यह कल से पहले दिन सहित विपक्ष के साथ पहुंचा है कि घर एक क्रमबद्ध तरीके से *संवैधानिक संशोधन* पर चर्चा करेगा । जिस पर विपक्ष ने वादा किया था और हमने दिया था।  इस पर चर्चा की जाएगी और सर्वसम्मति से वोट दिया जाएगा। उसके बाद सदन स्थगित किया गया था । हाउस स्थगित नहीं किया गया था। कल क्या हुआ ?  यह अभूतपूर्व चौंकाने वाला और *राज्यसभा की गरिमा और संसदीय लोकतंत्र की संस्था पर हमला* था, जब आपके पास *वोच और वार्ड स्टाफ मार्शल* नहीं था लेकिन लोग सादे कपड़ों में हमारे लिए वह पूरी तरह अज्ञात थे । यह कार्रवाई कल सरकार के हिस्से में एक कानून के माध्यम से *बहादली धक्का दे सकती* है, सरकार दावा कर सकती है कि उन्होंने इतने सारे कानून पारित किए हैं लेकिन क्या *लोकतांत्रिक* था? क्या चर्चा थी? उन कानूनों के पारित होने पर सहमति थी ? जवाब 'नहीं' है। वोक आउट के शब्द से फिर सभी पार्टी की बैठक 18 वीं को बुलाई गई थी । संसद शुरू होने से पहले *सरकार ने हर समझ का उल्लंघन किया* है और हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हमने क्या बताया कि *डेडलॉक, स्टेलेमेट और पंडोनियम* के लिए *संपूर्ण दोष सरकार का है। *विपक्ष एकजुट है* और हम अपनी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं और यही वह सच है, जो हमने बताया।【Photo Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•# संसद

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