जासूसी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर : जासूसी की दुनिया में पिगासस का बड़ा नाम है, जिससे फोन और डिवाइस को भी हैक किया जा सकता हैं / रिपोर्ट स्पर्श देसाई


【 मुंंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई】 भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक ट्वीट से तहलका मच गया है। स्वामी ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि" वॉशिंगटन पोस्ट "और "लंदन गार्जियन" एक रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले हैं जिसमें कई मंत्रियों और पत्रकारों के फोन टैपिंग की जानकारी है। कहा जा रहा है कि करीब 2,500 लोगों के टैप किए गए फोन कॉल्स को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस फोन टैपिंग के पीछे दुनिया के सबसे ताकतवर हैकिंग सॉफ्टवेयर पिगासस का नाम सामने आ रहा है।
बता दें कि साल 2019 में जब भारत समेत दुनियाभर के 100 से अधिक पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप अकाउंट की जासूसी हुई थी, उस समय पिगासस के बारे में पूरी दुनिया को विस्तार से जानकारी मिली थी और दो साल बाद Pegasus एक बार फिर से खबरों में है। आइए जानते हैं आखिर यह Pegasus सॉफ्टवेयर है क्या और यह काम कैसे करता है।
जासूसी का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर :
जासूसी की दुनिया में पिगासस का बड़ा नाम है। इससे उन फोन और डिवाइस को भी हैक किया जा सकता है जिसे लेकर कंपनियां दावा करती हैं कि यह हैकप्रूफ है। पिगासस एक स्पाईवेयर है जो चुपके से किसी भी डिवाइस की जासूसी कर सकता है। पिगासस जैसे स्पाईवेयर यूजर्स की जानकारी के बिना उनके फोन में मौजूद रहते हैं और फोन में मौजूद गोपनीय जानकारी को हैकर्स तक आसानी से पहुंचाते हैं। आपके फोन में स्पाईवेयर है या नहीं इसका पता लगाना बहुत ही मुश्किल काम है। आपको बता दें कि साल 2019 में पिगासस के जरिए ही भारत समेत दुनिया के करीब 1,400 पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी हुई थी। इसके अलावा अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप भी इसी सॉफ्टवेयर से हैक हुआ था।
क्या है और Pegasus और क्या-क्या कर सकता है?
इस्रायल के NSO ग्रुप/Q साइबर टेक्नोलॉजीजी ने इस स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ्टवेयर) को तैयार किया है। पिगासस का दूसरा नाम Q Suite भी है। पिगासस दुनिया के सबसे खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर्स में से एक है जो एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइस दोनों की जासूसी कर सकता है।
पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की इजाजत और जानकारी के बिना भी फोन में इंस्टॉल हो सकता है। एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद इस आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। पिगासस को किसी फोन में सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिए इंस्टॉल किया जा सकता है। यह फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट को भी पढ़ सकता है यानी इससे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप्स भी सुरक्षित नहीं हैं।
पिगासस सॉफ्टवेयर आपकी निजी जानकारियों पर बारिकी से नजर रख सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि फोन में इस सॉफ्टवेयर का कोई आइकन भी नहीं बनता जिसके जरिए आप इसकी पहचान कर सकें। यह सॉफ्टवेयर पासवर्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कैलेंडर, मैसेज, माइक्रोफोन, कैमरा और विभिन्न मैसेजिंग एप्स के कॉलिंग फीचर पर पल-पल नजर रखने में माहिर है। पिगासस यूजर का जीपीएस लोकेशन भी ट्रैक करता है।
 करोड़ से भी अधिक है पिगासस सॉफ्टवेयर की कीमत :
इकोनॉमिक्स टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिगासस सॉफ्टवेयर की कीमत 7-8 मिलियन डॉलर यानी करीब 56 करोड़, 56 लाख, 40 हजार रुपये है। इस कीमत में पिगागस सॉफ्टवेयर का एक साल के लिए लाइसेंस मिलता है। एक लाइसेंस पर आप एक साल में 500 फोन को मॉनिटर कर सकते हैं। पिगासस के जरिए एक बार में 50 मोबाइल फोन पर पल-पल नजर रखी जा सकती है।पिगासस सॉफ्टवेयर यूजर की परमिशन के बिना उसके फोन को ऑफ/ऑन के अलावा फॉर्मेट भी मार सकता है।
Pegasus से ही हुआ था जेफ बेजोस का फोन हैक :
जनवरी 2020 में 'द गार्जियन' ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 8 नवंबर 2018 को जेफ बेजोस को एक व्हाट्सएप मैसेज भेजकर उनके फोन को हैक किया गया था। अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक हुआ था और हैकिंग का आरोप सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पर लगा था। बेजोस को मैसेज सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के पर्सनल व्हाट्सएप अकाउंट से भेजा गया था, हालांकि अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि जेफ बेजोस के फोन से क्या-क्या डाटा चोरी हुए। जेफ बेजोस का व्हाट्सएप अकाउंट हैक के पीछे भी पिगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus) का ही नाम सामने आया था।
MP हनीट्रैप में भी हुआ पिगासस का इस्तेमाल :
इस पिगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप कांड में भी हुआ था। 2020 में कई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि बंगलूरू की एक कंपनी नेताओं और अफसर के फोन टैपिंग के लिए पिगासस (Pegasus) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती थी। यह सॉफ्टवेयर फोन में छिपकर कॉल रिकॉर्डिंग, वॉट्सएप चैटिंग, एसएमएस के साथ अन्य चीजों की सर्विलांस आसानी से कर सकता है।
आईफोन पर हो चुका है हैकिंग का प्रयास :
2016 में एनएसओ ने पिगासस के जरिए आईफोन को हैक करने की कोशिश की थी। जैसे ही एपल को इसकी जानकारी मिली, तो कंपनी ने तुरंत यूजर्स के लिए अपडेट जारी किया था। वहीं, 2017 में आई रिपोर्ट में पता चला था कि सबसे समाजिक कार्यकर्ता अहमद मंसूर को पिगासस की जानकारी मिली थी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया था कि हाईटेक प्लेटफॉर्म को हैक करने के लिए इस सॉफ्टवेयर पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद से ही एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम को हैक करना आसान हो गया था।
सरकारी एजेंसियां करती हैं इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल : सिटिजन लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां पिगासस जैसे स्पाईवेयर के जरिए उन यूजर्स की जासूसी करती हैं, जिससे सरकार को खतरा होता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस सॉफ्टवेयर को राजनीतिक इरादों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
 अमरीकी अखबार "द वॉशिंगटन पोस्ट" ने दुनियाभर के 16 अन्य मीडिया सहयोगियों के साथ मिलकर" द पेगासस प्रोजेक्ट" नाम से जांच रिपोर्ट जारी की है । इस जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्राइवेट इज़राइली" सॉफ्टवेयर पेगासस "का इस्तेमाल फोन टैप करने में किया गया । इसमें दुनियाभर के 37 स्मार्टफोन को हैक करने में कामयाबी भी मिली। ये स्मार्टफोन बड़े पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता, व्यापारी अधिकारी और 2 ऐसी महिलाओं जो कि सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खसोगी की हत्या से जुड़ी थीं, उनके थे ।
न्यूज़ वेबसाइट "द वायर" के मुताबिक भारत करीब 300 लोगों की जासूसी पेगासस के स्पाइवेयर के ज़रिए की गई, जिसमें 40 पत्रकार भी शामिल हैं । जिनके फोन हैक करने का दावा किया गया है उनमें मंत्री से लेकर विपक्ष के नेता, पत्रकार, लीगल कम्युनिटी, कारोबारी, सरकारी अफसर, वैज्ञानिक और एक्टिविस्ट्स तक शामिल हैं। दावा है कि इन लोगों पर फोन के ज़रिए निगरानी रखी जा रही थी । हालांकि केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया है ।
इस जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि "पेगासस स्पाइवेयर" के ज़रिए "इंडियन एक्सप्रेस", "हिंदुस्तान टाइम्स"," न्यूज़ 18", "इंडिया टुडे", द हिंदू", "द वायर" और" द पायनियर" जैसे मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों को निशाना बनाया गया था । दावा है कि एक भारतीय एजेंसी ने साल 2017 से लेकर 2019 के बीच इन सस्थानों में काम करने वाले पत्रकारों की निगरानी के लिए इनके फोन को टैप किया था ।
भारत सरकार ने इस मामले पर कहा है कि सरकार पर कुछ लोगों की जासूसी का जो आरोप लगाया गया है, उसका कोई मज़बूत आधार नहीं है और न ही इसमें कोई सच्चाई है । बयान में कहा गया है कि इससे पहले भी इस तरह का दावा किया गया था, जिसमें वाट्सएप के ज़रिए पेगासस के इस्तेमाल की बात कही गई थी । वो रिपोर्ट भी तथ्यों पर आधारित नहीं थी और सभी पार्टियों ने दावों को खारिज किया था । वाट्सएप ने तो सुप्रीम कोर्ट में भी इन आरोपों से इनकार कर दिया था ।
दरअसल इस मिलिट्री ग्रेड स्पाइवेयर को आतंकियों और अपराधियों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल का लाइसेंस मिला हुआ है लेकिन इसके ज़रिए 37 स्मार्टफोन को कामयाबी के साथ हैक किया गया । लिस्ट में 50 हज़ार से ज्यादा फोन नंबर मौजूद थे । जांच में दावा किया गया है कि जो देश अपने नागरिकों की जासूसी के लिए जाने जाते हैं वो इज़राइली फर्म एनएसओ ग्रुप के क्लाइंट भी हैं । एनएसओ ग्रुप दुनिया की स्पाइवेयर इंडस्ट्री की वर्ल्डवाइड लीडर है ।
भारतीय नेताओं और पत्रकारों के फोन किए गए हैक पेगासस स्पाइवेयर से भारतीय पत्रकारों की जासूसी का द वायर मीडीया ने किया था भारत में यह खुलासा । इजरायल की एमएसओ के" पेगासर्स स्पाइवेयर" से 
हिंदुस्तान टाइम्स, इंडिया टुडे, नेटवर्क 18, द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस सहित बड़े मीडिया संस्थानों के बड़े पत्रकार 40 भारतीय पत्रकारो और उच्च संपादको की जासूसी की हुई पुष्टी । फोरेंसिक ईन्वेस्टिगेशन में यह मामला बहार आया । इजराइल की एमएसओ कंपनी भारत सरकार से अन्य एजन्सी ओ के सिकयोरिटी सिस्टम पर काम करने करारबध्ध है। उन्हीं कंपनी के स्पाइवेयर सोफ्टवेयर जासूसी से भारतीय पत्रकारों के मोबाईल में घूस कर उनका सभी डाटा ले गया होगा और दूसरे मटिरियल्स प्लान्ट कर दिया होगा। 
जानेमाने तहकीकाती मीडिया #theWire ने यह दावा किया हैं । अभी तक भारत सरकार ने उसी मामले कोई प्रत्याघात नही दिया है ।【हालांकि भारत सरकार और सभी पार्टियों ने इस कांड के मामले को खारिज कर दिया है।】 ना एमएसओ कंपनी से कोई टिप्पणी आई हैं । ज्यादातर जासूसी साल 2019 के चुनाव पहले की बतायी है । "द वायर" के दो वरीष्ठ पत्रकारों विदेशी न्यूज़ एजन्सी से समाचारों के आदान-प्रदान करते रहते हैं । यह तिसरा मामला हेकिंग का बना है । पहले वोट्सअप के साथ छेड़छाड़ हुई थी । 
सरकारी/MSO एजन्सी से किसी प्राईवेट शख्सियत को गलत तरीकों से यह स्पाइवेयर मिला होगा और उसीने सभी 40 पत्रकारों पर तकनिकी घालमेल किया होने का अंदेशा बताया गया । 【Photo Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•# हेकिंग

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