√• SC के 4 पूर्व जज का बड़ा बयान- असहमति के खिलाफ हथियार बन गया राजद्रोह कानून, इसे रद्द करने की जरूरत / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
√• SC के 4 पूर्व जज का बड़ा बयान- असहमति के खिलाफ हथियार बन गया राजद्रोह कानून, इसे रद्द करने की जरूरत / रिपोर्ट स्पर्श देसाई
【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】उच्चतम न्यायालय के 4 पूर्व न्यायाधीशों ने राजद्रोह कानून और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम को रद्द करने की हिमायत करते हुए कहा कि असहमति और सरकार से सवाल पूछने वाली आवाजों को दबाने के लिए आमतौर पर इन कानूनों का दुरुपयोग किया जाता है । यूएपीए के तहत आरोपी 84 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत का जिक्र करते हुए 4 पूर्व न्यायाधीशों में एक आफताब आलम ने कहा, यूएपीए ने हमें दोनों मोर्चों पर नाकाम कर दिया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक स्वतंत्रता है ।
न्यायमूर्ति आलम और पूर्व न्यायाधीश दीपक गुप्ता, मदन बी लोकुर और गोपाल गौड़ा ने लोकतंत्र,असहमति और कठोर कानून- क्या यूएपीए और राजद्रोह कानून को कानून की किताबों में जगह देनी चाहिए? विषय पर एक परिचर्चा को संबोधित किया । जहां न्यायमूर्ति आलम ने कहा कि ऐसे मामलों में मुकदमे की प्रक्रिया कई लोगों के लिए सजा बन जाती है । वहीं न्यायमूर्ति लोकुर का विचार था कि इन मामलों में फंसाए गए और बाद में बरी होने वालों के लिए मुआवजे की व्यवस्था होनी चाहिए ।
इसी विचार से सहमति व्यक्त करते हुए न्यायमूर्ति गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में इन कठोर कानूनों का कोई स्थान नहीं है । न्यायमूर्ति गौड़ा ने राय व्यक्त की कि ये कानून अब असहमति के खिलाफ एक हथियार बन गए हैं और उन्हें रद्द करने की जरूरत है । न्यायमूर्ति आलम ने कहा, यूएपीए की आलोचनाओं में से एक यह है कि इसमें दोषसिद्धि की दर बहुत कम है लेकिन मामले के लंबित रहने की दर ज्यादा है । यह वह प्रक्रिया है जो सजा बन जाती है ।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि 2019 में अदालतों में यूएपीए के तहत दर्ज 2,361 मुकदमे लंबित थे, जिनमें से 113 मुकदमों का निस्तारण कर दिया और सिर्फ 33 में दोषसिद्धि हुई, 64 मामलों में आरोपी बरी हो गये और 16 मामलों में आरोपी आरोप मुक्त हो गये । उन्होंने कहा दोषसिद्धी दर 29.2% है । पूर्व न्यायाधीश ने कहा, अगर दर्ज मामलों या गिरफ्तार लोगों की संख्या से तुलना की जाए तो दोषसिद्धि की दर घटकर 2% रह जाती है और लंबित मामलों की दर बढ़कर 98% हो जाती है ।【Photo Courtesy Google】
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•#राजद्रोह

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