√•हाईकोर्ट की महाराष्ट्र सरकार को फटकार- डॉक्टरों की रक्षा को लेकर गंभीर नहीं है आप / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

√•हाईकोर्ट की महाराष्ट्र सरकार को फटकार- डॉक्टरों की रक्षा को लेकर गंभीर नहीं है आप / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई 】महाराष्ट्र सरकार मरीजों के परिजन के हमले से अपने डॉक्टरों को बचाने के लिए गंभीर नहीं दिख रही है । यह टिप्पणी आज बंबई उच्च न्यायालय ने की । मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की पीठ राज्य स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव की तरफ से दायर हलफनामे का हवाला दे रही थी । उच्च न्यायालय के 13 मई के आदेश पर विभाग ने हलफनामा दायर किया था । पीठ ने अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों पर हमले को लेकर दर्ज प्राथमिकियों के बारे में उच्च न्यायालय को सूचित करें और उनकी रक्षा के लिए उठाए गए कदमों से भी अवगत कराएं ।

हलफनामे में बताया गया कि राज्य भर में 436 मामले दर्ज किए गए लेकिन इसमे इस तरह के मामलों की समय सीमा या ब्यौरा नहीं बताया गया । पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के पहले के आदेश में जो भी सवाल पूछे गए थे उनका इस हलफनामे में कोई जवाब नहीं है । पीठ ने कहा, यह काफी निराशाजनक है कि एक पन्ने का हलफनामा दायर किया गया है । अगली बार से हम तब तक हलफनामा स्वीकार नहीं करेंगे जब तक कि इसे सरकारी वकील द्वारा तैयार नहीं किया गया हो  ।

दौरान एक दूसरे केस की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने की थी बेहद तल्ख टिप्पणी- नेताओं के लिए गलती स्वीकार करना उनके खून में नहीं ।

न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को लेकर लगाई गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि नेता और अफसरशाही के लिए गलती और अयोग्यता को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है और ये उनके खून में नहीं है ।

दरअसल, दिल्ली में न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा था । कोर्ट ने दिल्ली सरकार को न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने पर विचार करने को कहा है । कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार को स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से जुड़े जुडिशल ऑफिसर के लिए ही यह पर्याप्त होगा. हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक अधिकारियों या जजों को इस दायरे में लाने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि इसको लेकर तमाम तरह के अलग प्रोटोकॉल हैं । पिछले कुछ वक्त में कोरोना से 3 न्यायिक अधिकारियों की मौत हो चुकी है । ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करके कुछ सुविधाएं देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी ।

हाई कोर्ट में याचिका दिल्ली जुडिशल सर्विस एसोसिएशन की तरफ से दाखिल की गई है । इस याचिका में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी न्यायिक तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए बाहर निकल रहे हैं । बहुत सारे न्यायिक अधिकारियों को जेल जाकर भी मामलों की सुनवाई करनी पड़ रही है । लगातार न्यायिक अधिकारी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं । ऐसे में लोगों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे न्यायिक अधिकारियों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित किया जाए ।【Photos Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel• #हाईकोर्ट




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