√• भारत ने म्यांमार में सैन्य बलों के दमन के बावजूद परेड में प्रतिनिधियों को भेजा, पाकिस्तान सहित 7 देश भारत के साथ सैन्य परेड में हिस्सा लिया/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई

√•  भारत ने म्यांमार में सैन्य बलों के दमन के बावजूद परेड में प्रतिनिधियों को भेजा, पाकिस्तान सहित 7 देश भारत के साथ सैन्य परेड में हिस्सा लिया/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई


【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】 म्यांमार में निर्दोष लोगों पर भारी सैन्य दमन और हवाई हमले के बावजूद भारत और सात अन्य देशों ने म्यांमार की सैन्य परेड में सैन्य प्रतिनिधियों को भेजने के लिए कड़ी आलोचना की है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम, रूस, थाईलैंड और अन्य ने शनिवार 27 मार्च को म्यांमार सशस्त्र बल दिवस परेड में हिस्सा लिया था ।

 रविवार 28 मार्च को संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार के सैन्य दमन की कड़ी आलोचना की थी । संयुक्त राष्ट्र ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर व्यापक और सावधानी पूर्वक और व्यवस्थित हमलों की निंदा की है। भारत ने म्यांमार के सैन्य तख्तापलट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत भी इस पर चुप रहा था।  इस बीच  सेना की परेड में भाग लेने पर उसकी गहरी गूँज उठी हैं ।

दौरान म्यांमार के नागरिकों को शरण देने पर रोक लगाने वाला आदेश मणिपुर सरकार ने लिया वापस ।
मणिपुर सरकार ने म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के कारण भारत आ रहे म्यांमारी नागरिकों को शरण देने पर रोक लगाने वाले अपने एक पुराने आदेश को वापस ले लिया है। 26 मार्च को जारी किए गए इस आदेश के लिए राज्य सरकार को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब सरकार ने आदेश को वापस लेते हुए कहा है कि इसे गलत समझा गया और इस गलतफहमी को दूर करने के लिए आदेश को वापस लिया जा रहा है। गौरतलब हैं कि मणिपुर सरकार का आदेश दिया था कि यांमार के लोगों को देश में न घुसने दें, न शरणार्थी शिविर लगाएं, न खाना-पानी दें ।

मणिपुर की सरकार ने म्यांमार से आने वाले लोगों के एंट्री पर बैन लगाने का आदेश दिया था । इस आदेश को लेकर 5 ज़िलों के कमिश्नर को चिट्ठी लिखी गई थी । ये सारे ज़िले मणिपुर की सीमा से सटे है ।सरकार ने कहा है कि सिर्फ मानवीय या फिर मेडिकल जरूरत के आधार पर ही लोगों को भारत में आने दिया जाए । सरकार को डर था कि वहां के नागरिक भारत में शरणार्थी बनकर घुसने का प्रयास कर सकते हैं ।

मणिपुर के गृह सचिव एच ज्ञान प्रकाश की तरफ से लिखी गई इस चिट्ठी में कहा गया था कि सैन्य तख्तापलट के बाद म्यांमार के नागरिक भारत में घुसने का प्रयास कर रहे हैं । ऐसे में जिलों को निर्देश दिया है कि वो उन्हें देश में न घुसने दे । शरणार्थियों के लिए न राहत शिविर बनाएं और न खाने-पीने का इंतजाम करें । वे शरण मांगने आएं तो उन्हें हाथ जोड़कर वापस भेज दिया जाए । मंगलवार 30 मार्च तक सभी ज़िलों से रिपोर्ट मांगी गई थी । बता दें कि भारत और म्यांमार के बीच करीब 1643 किलोमीटर की सीमा है ।

मिजोरम के अधिकारियों ने सोमवार 29 मार्च को बताया था कि म्यांमार में फरवरी में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद से वहां से राज्य में आए शरणार्थियों की संख्या 1,000 पार कर गयी है । अब तक कम से कम 100 लोगों को उनके देश वापस भेजा दिया गया है , लेकिन वे छुपकर वापस भारत में की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं । रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर लोग सीमावर्ती गांवों में रह रहे हैं और स्थानीय एनजीओ उनकी मदद कर रहे हैं, कुछ लोग अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं ।
दौरान म्यांमार शरणार्थियों को कोई भी मदद देने से रोकने का आदेश मणिपुर सरकार ने विरोध के बाद  वापस ले लिया गया था ।

मणिपुर की सरकार ने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें म्यांमार से आने वाले लोगों को घुसने से रोकने तथा उनके लिए कोई राहत शिविर या खाना-पीने का इंतजाम करने से मना किया गया था । इस आदेश को लेकर 5 ज़िलों के कमिश्नर को 26 मार्च को चिट्ठी लिखी गई थी । ये सारे ज़िले मणिपुर की सीमा से सटे है ।सरकार ने कहा था 
 जारी की गई है । इसमें लिखा है कि पुरानी चिट्ठी के आदेश को लोगों ने अलग तरीके से समझ लिया था । इसमें लिखा है, सरकार मानवीय आधार पर म्यांमार के लोगों की मदद कर रही है । इसको लेकर सारे कदम उठाए जा रहे हैं । भारत आने वाले लोगों को इलाज कराने के इम्फाल भेजा जा रहा है । 【Photo Courtesy Google】
 
★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•

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