√•गुजरात : क्या IPS गिरीश सिंघल भी अब इशरत जहां एनकाउंटर मामले में रिहा होंगे? /रिपोर्ट स्पर्श देसाई

√•गुजरात :  क्या IPS गिरीश सिंघल भी अब इशरत जहां एनकाउंटर मामले में रिहा होंगे? /रिपोर्ट स्पर्श देसाई 


 
【मुंंबई / रिपोर्ट स्पर्श देसाई 】इशरत जहां सहित कुल चार लोगों की गुजरात पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी थी । जबकि साल 2004 में अहमदाबाद हवाई अड्डे के पास मुंबई के एक कॉलेज में अध्ययन कर रही इसरतजहां और दूसरे तीन लोगों का गुजरात पुलिस ने एन्काउंटर कर दिया था गया। पुलिस ने दावा किया कि चारों  गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने आए थे। यह मामला उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया था । जिसने सीबीआई को जांच सौंपी थी। अहमदाबाद सत्र न्यायालय में चल रही कार्यवाही के दौरान सीबीआई ने गुजरात सरकार से अनुमति मांगी थी। मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लेकिन गुजरात सरकार ने अनुमति देने से इनकार कर दिया था। मामले ने अब आईपीएस अधिकारी गिरीश सिंघल सहित सभी की रिहाई का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।  हालांकि  मामले की अंतिम सुनवाई 31 मार्च को होनी है।



 साल 2004 में पुलिस ने दावा किया कि मुंंबई की कॉलेज गर्ल इशरत जहां, जावेद-अमजद और प्राणेश पिल्लई मुंबई से गांधीनगर की तरफ हथियार लेकर एक कार में जा रहे थे । जब वे पुलिस के फर्जी एन्काउंटर में मारे गए थे। गुजरात के हवाई अड्डे के पास। इस मामले को तब उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष जांच दल द्वारा उच्च न्यायालय में ले जाया गया था। आईपीएस सदस्य सतीश वर्मा की कार्य पद्धति से सरकार नाराज थी । जिसने सतीश वर्मा को कमिटी के गठन के बाद गुजरात के बाहर स्थानांतरित कर दिया था। साल 2014 में केंद्र में एनडीएस सरकार थी। इस मामले में काफी विवाद हुआ था।
 इस मामले को बाद में केस को CBI को सौंप दिया गया था । जिसमे गिरीश सिंघल और अन्य पुलिस अधिकारियों को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि CBI इस मामले में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी थी। अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया था । जबकि इशरत जहां मामले में सिंधल जेल में कम समय रहे थे। साथ में किसी अन्य एनकाउंटर केस में भी वो जूडे थे । इस मामले की सुनवाई अहमदाबाद सेशंस कोर्ट में हो रही है । जहाँ बचाव पक्ष ने दलील दी कि एनकाउंटर के समय पुलिस अधिकारी ड्यूटी पर मौजूद थे । जबकि सरकारी अधिकारी ड्यूटी पर थे और उन पर मुकदमा चलाया जाना था। आपराधिक प्रक्रिया संहिता 197 के तहत जांच एजेंसी की सत्तामंडल की मंजूरी लेना अनिवार्य था। बिना अनुमति के अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
  अदालत ने मामले पर गुजरात सरकार से जानकारी मांगी थी । गुजरात सरकार ने शनिवार 20 मार्च को अदालती कार्यवाही के दौरान अनुमति देने से इनकार कर दिया था । जिसके मद्देनजर गिरीश सिंघल की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हो गया था। IGP गिरीश सिंघल वर्तमान में "कराई पुलिस अकादमी" में कमांडो प्रशिक्षण ले रहे हैं। 【Photos by MCP】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई √•Metro City Post•News Channel•

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