√• कोरोना पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई में सरकार को लगाई फटकार : जब AG ने कहा- ऑक्सीजन, बेड्स की नहीं है कमी तो चीफ जस्टिस बोले- फिर क्यों लगी हैं लाइनें? / रिपोर्ट स्पर्श देसाई

√• कोरोना पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई में सरकार को लगाई फटकार : जब AG ने कहा- ऑक्सीजन, बेड्स की नहीं है कमी तो चीफ जस्टिस बोले- फिर क्यों लगी हैं लाइनें? / रिपोर्ट स्पर्श देसाईशं


【मुंंबई/ रिपोर्ट स्पर्श देसाई】गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर स्वत:संज्ञान लेते हुए इसपर सुनवाई हुई थी । पूरे देश में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर तेजी से फैल रहा है। इसी बीच गुजरात उच्च न्यायालय ने राज्य में कोरोना वायरस की स्थिति पर स्वत:संज्ञान लेते हुए इसपर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने महाधिवक्ता (AG) कमल त्रिवेदी से राज्य में कोरोना के बढ़ते मामले, ऑक्सीजन, बेड्स और दवाओं को लेकर कई सवाल किए गए थे।

मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति भार्गव डी. करिया की पीठ ने राज्य में तेजी से बढ़ते COVID-19 मामलों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने कहा कि अब लोगों की इस महामारी से लड़ाई है। उन्होने लोगों से अपील की कि वे Remdisivir इंजेक्शन के लिए जल्दबाजी न करें। महाधिवक्ता ने ऑक्सीजन को र्ट से कहा कि उत्पादन से, 70% ऑक्सीजन स्वास्थ्य क्षेत्र में जाना चाहिए।

त्रिवेदी ने कोर्ट से कहा है कि लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है, इससे रोजाना कमाने वाले दिहाड़ी मजदूरों को परेशानी होती है। उन्होने कहा लॉकडाउन लगाने से अच्छा है कि आप खुद को घरों में बंद कर ले। महाधिवक्ता ने कहा “सब कुछ नियंत्रण में है, सरकार अपना काम कर रही है, अब लोगों को अधिक सतर्क रहना होगा।”

इसपर चीफ जस्टिस ने कहा “आम आदमी को रिपोर्ट मिलने में 4-5 दिन लगते हैं, जबकि अधिकारियों को आरटी-पीसीआर रिपोर्ट घंटे भर के भीतर मिल सकती है। सैंपल कलेक्शन और टेस्ट तेज होना चाहिए। तालुका और छोटे गांवों में कोई आरटी-पीसीआर परीक्षण केंद्र नहीं है।”

अदालत ने कहा “जब गुजरात के लिए 27,000 Remdesivir इंजेक्शन उपलब्ध हैं, तो पता करें कि कितने अप्रयुक्त हैं। चीफ जस्टिस ने आगे पूछा “हर COVID अस्पताल में इंजेक्शन क्यों उपलब्ध नहीं हैं?” चीफ जस्टिस कहते हैं-राज्य हमेशा यह पता लगा सकता है कि इंजेक्शनको इतनी अधिक कीमत पर क्यों बेचा जा रहा है ?

उन्होने आगे फटकार लगाते हुए कहा था कि “जब आप (महाधिवक्ता) कह रहे हैं कि ऑक्सीजन और बिस्तर उपलब्ध हैं, तो लोगों को कतार में क्यों खड़ा होना पड़ता है?” मामलों पर नियंत्रण कैसे किया जाये ? इस पर चीफ जस्टिस ने कहा “शादियों में लोगों की संख्या 50 से होनी चाहिए, लोगों के स्वास्थ्य की जांच के लिए हाउसिंग सोसाइटियों में बूथ बनाएं, उन धार्मिक केन्द्रों से मदद ले जो कोविड केयर सेंटर में मदद कर सकते हैं। आखिर में कोर्ट ने कहा “हम सरकार की नीति से संतुष्ट नहीं हैं। कुछ चीजों को ठीक करना पड़ेगा ताकि लोग इस महामारी को लेकर गंभीरता से सोचें।” कोर्ट ने कहा “क्या कार्रवाई की गई इसकी जांच करने के लिए 15 अप्रैल को फिर बैठक बुलाई जाएगी।【Photo Courtesy Google】

★ब्यूरो रिपोर्ट स्पर्श देसाई√•Metro City Post•News Channel•
 

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